रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। तुष्टिकरण ने तो सृष्टि की सारी व्यवस्था बिगाड़ दी है। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने आरक्षण का कोटा बनाया लेकिन इसे स्थायी बनाने की बात नहीं कही थी। तुष्टिकरण की वजह से न सिर्फ यह स्थायी हो रहा है बल्कि दिनोंदिन बढ़ रहा है। पता नहीं तुष्टिकरण की इस नीति के चलते भविष्य में कितने ज्वालामुखी फट पड़ेंगे। उक्त विचार छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में संत प्रवीण ऋषि म.सा. ने व्यक्त किया।

संत ने कहा कि द्वापरयुग में भीष्म पितामह ने यदि तुष्टिकरण की नीति न अपनाई होती तो महाभारत कभी नहीं होता। भीष्म पितामह में इतना सामर्थ्य था कि दुर्योधन और दु:शासन उनके सामने खड़े होने का दुस्साहस कभी नहीं करते। लेकिन, भीष्म पितामह ने पूरे जीवन तुष्टिकरण की नीति अपनाई। भीष्म पितामह ने यदि अपने सामर्थ्य का सही इस्तेमाल किया होता तो महाभारत टल सकता था।

नदी के इस पार रहें या उस पर

संत ने कहा कि सारे समझौते मजबूरी में किए जाते हैं। सही मौका मिलते ही समझौते तोड़ दिए जाते हैं इलिए व्यक्ति को कभी समझौता नहीं करना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में बहुत से लोग मध्यममार्गी बनने की सलाह भी देते हैँ, लेकिन यह अवधारणा ही गलत है। इसे ऐसे समझिए कि नदी में तेज बाढ़ आई है। आप तभी बच सकते हैं जब आप नदी के इस पार रहेंगे या उस पार।

मध्यममार्गी बनकर बीचोबीच खड़े हो जाएंगे तो नदी का तेज बहाव ऐसा बहाएगा कि संभलना मुश्किल हो जाएगा। संत ने कहा कि परायों से लड़कर जो राज्य स्थापना करे उसे रामायण कहते हैं, और जो परायों को भी अपना बना ले उसे जिनशासन कहते हैं ।

Posted By: Kadir Khan

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