रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रायपुर नगर निगम के अधिकारी बड़े चतुर निकले। यहां के जनप्रतिनिधियों के साथ छह दिनों तक गर्मी में घूमने के बाद इन्होंने नेताओं को तो बिदा कर दिया और ये स्वयं ठंडे प्रदेश की ओर निकल गए। जनप्रतिनिधि यहां लौटकर अपना संस्मरण सुनाकर लोगों को बता रहे हैं कि हम घूमने नहीं बल्कि अध्ययन यात्रा पर गए थे। वहीं, इनके साथ गए दस जोन के कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लेह-लद्दाख में ठंडी का आनंद उठा रहे हैं। अधिकारियों की यह मौज-मस्ती पार्षदों को पसंद नहीं आ रही है। सत्तापक्ष के पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। पार्षदों का कहना है कि एक साथ दल के सदस्य बनकर निकले अधिकारियों को अलग से सैर सपाटे पर लेह-लद्दाख भेजा गया, यह गलत है। ये पूछ रहे हैं कि हम लोगों को भी क्यों नहीं ले जाया गया? एक ने कहा-नेता और अधिकारी के बीच सदा से ही अंतर रहा है।

चहुंओर बुलडोजर की ही चर्चा

शहर के मुख्य सड़क और फुटपाथ पर कब्जा जमाने वालों के खिलाफ इन दिनों नगर निगम प्रशासन ने मोर्चा खोल रखा है। हर रोज न केवल कब्जे हटाये जा रहे है, बल्कि उनके सामान भी जब्त किए जा रहे है। कार्रवाई के दायरे में छोटे से लेकर बड़े और रसूखदार कारोबारी भी आ रहे है। लंबे समय बाद मौदहापारा में आधी सड़क घेरकर लोहा, छड़, शेड, चौखट, दरवाजा आदि की दुकान लगाने वालों पर निगम अमले ने खुलकर कार्रवाई की। मालवीय रोड, एमजी रोड, पंडरी आदि क्षेत्र में रसूखदारों के फ्लेक्स, बोर्ड हटाने के साथ सामानों की भी जब्ती की गई। इस कार्रवाई के दौरान निगम अमले को विरोध का भी सामना करना पड़ा। पुलिस बल की मौजूदगी में हर जगह पर सड़क घेरने वालों पर निगम का बुलडोजर चल रहा है। चहुंओर बुलडोजर की ही चर्चा है। इस अभियान के लिए लोग नईदुनिया को धन्यवाद भी दे रहे हैं।

पदोन्नाति की फाइल से मचा बवाल

साइबर कैडर के डीएसपी पद पर पदोन्नाति की फाइल को लेकर पुलिस महकमे में विवाद बढ़ने के साथ बवाल मच गया है। दरअसल साइबर कैडर के डीएसपी के पद पर कंप्यूटर कैडर में नियुक्त इंस्पेक्टर को प्रमोट करने की तैयारी थी। इसके लिए गुपचुप तरीके से डीपीसी करने का भी आरोप लग रहा है। पूरा मामला सामने आने के बाद साइबर कैडर के इंस्पेक्टरों ने मोर्चा खोल दिया। मामला पीएचक्यू और गृह विभाग तक जा पहुंची है। इससे बाकी इंस्पेक्टरों में भारी नाराजगी है। इसको लेकर एक इंस्पेक्टर का दर्द भी झलक उठा है। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि वर्षों तक नौकरी करने के बाद भी उन्हें पदोन्नाति नहीं मिली। अनावश्यक देरी की जा रही है। वहीं, कंप्यूटर कैडर के इंस्पेक्टर के लिए विशेष केस मानकर पदोन्नाति देने की तैयारी है। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि कंप्यूटर कैडर से डीएसपी के लिए पद ही नहीं है।

आयुक्त का आदेश तक नहीं मान रहे अधिकारी

अधीनस्थ अधिकारी जब अपने आयुक्त की ही बात न सुने तो क्या कहा जाए? बात नगर निगम की हो रही है। 600 करोड़ की लागत से मिशन अमृत योजना के तहत पाइप लाइन बिछाने, टंकी बनाने और फिल्टर प्लांट में 80 एमएलडी संयंत्र में देरी का है। लगता है ठेका एजेंसी इंडियन ह्यूम पाइप पर निगम के अधिकारी मेहरबान हैं। आयुक्त ने ठेका एजेंसी पर एक करोड़ का जुर्माना लगाने का आदेश दिया, लेकिन नहीं लगाया गय। जब आयु्क्त ने पूछा तब अधिकारी बगले झांकने लगे। पता चला कि जुर्माना कटा ही नहीं है। बल्कि इसे रोककर रखा गया है। महापौर ने अधिकारियों के इस रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा कि ये सब क्या है? काम नहीं करने वाली एजेंसी पर कड़ाई क्यों नहीं हो रही? अब क्या बताएं, निगम में जोन स्तर पर कई ऐसे खेल हो रहे हैं जिसकी जानकारी कभी सार्वजनिक ही नहीं होती है।

Posted By: Sanjay Srivastava

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