रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्याही-कलम से लिखी गई संविधान की मूल कापी की हूबहू प्रतिकृति देखनी हो तो आप भी पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पं. सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय ग्रंथालय आ सकते हैं। इस ग्रंथालय में कोई भी व्यक्ति संविधान की मूल कापी की प्रतिकृति देख सकता है, पढ़ सकता है। खास बात यह है कि इस प्रति में एक भी संशोधन नहीं है। यह पूरी तरह हस्तलिखित पुस्तक है। पुस्तक के हर पन्नो पर लिथो प्रिंट से बार्डर वगैरह बनाया गया है, जो देखने में काफी सुंदर दिखता है।

इस पुस्तक में हस्तलेखन इतना बेहतर है कि जिसे दूर से देखने के बाद लगता ही नहीं कि यह किसी की हाथ से लिखी पुस्तक है। पुस्तक का कवर वूड प्रिंट से तैयार किया गया है, जो काफी पुरानी कला को दर्शाता है। पं. रविवि के जनसंपर्क अधिकारी डा. सुपर्णसेन गुप्ता बताते हैं कि यह संविधान की मूल कापी की ही प्रतिकृति है, जिसे भारत सरकार ने इस ग्रंथालय में भेजा है।

संविधान दिवस 26 नवंबर को मनाते हैं। भारत गणराज्य का संविधान 26 नवंबर, 1949 को बनकर तैयार हुआ था। इसके निर्माण में छत्तीसगढ़ के माटी के पुत्रों ने भी खास भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ के जिन विद्वानों के संविधान की मूल प्रति पर हस्ताक्षर हैं, उनमें छत्तीसगढ़ अंचल की रियासतों से किशोरीमोहन त्रिपाठी व रामप्रसाद पोटाई एवं मध्यप्रांत बरार (छत्तीसगढ़) के प्रतिनिधियों में रायपुर से पं. रविशंकर शुक्ल, बालोद से बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल और दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्ता शामिल हैं।

जानें किसकी क्या रही है भूमिका

पं. रविशंकर शुक्ल - मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे और संविधान सभा के सदस्य थे। उनका जन्म सागर में हुआ था। राजधानी के बूढ़ापारा में उनका घर आज भी है। इनके नाम से पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय संचालित है। संविधान सभा के सदस्य के तौर पर संविधान के निर्माण में स्व. शुक्ल ने अहम भूमिका निभाई थी। उस समय छत्तीसगढ़ सेंट्रल प्रोविंस एवं बरार ब्रिटिश शासन का एक प्रांत था। यह प्रांत मध्य भारत के उन राज्यों से बना था, जिन्हें अंग्रेजों ने मराठों एवं मुगलों से जीता था।

बैरिस्टर छेदीलाल: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैरिस्टर छेदीलाल संविधान सभा के सदस्य थे। उनका जन्म बिलासपुर के अकलतरा के प्रतिष्ठित जमींदार परिवार में 1886 को तीज के दिन हुआ था। बैरिस्टर छेदीलाल के पास चार भाषा की महारथ हासिल थी। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत पर इनका पूरा अधिकार था। बैरिस्टर छेदीलाल ने आक्सफोर्ड में पढ़ाई पूरी की। आपने इतिहास में एमए, एलएलबी तथा बार-एट-ला की उपाधि प्राप्त की। अपनी विद्वता से कानून के क्षेत्र में बहुत कीर्ति अर्जित की थी।

घनश्याम सिंह गुप्ता: संविधान की हिंदी शब्दावली के लिए काम करने के लिए दुर्ग में जन्मे संविधान सभा के सदस्य घनश्याम सिंह गुप्ता मशहूर थे। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में राजनीतिक सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में भी योगदान दिया। नवंबर 1933 में गांधी जी के दुर्ग आए तो घनश्याम सिंह गुप्ता के निवास में गए थे। घनश्याम सिंह गुप्ता के नाम से बालोद में आज भी घनश्याम सिंह गुप्त कालेज संचालित है।

रामप्रसाद पोटाई: कांकेर के गांव कन्हारपुरी निवासी रामप्रसाद पोटाई संविधान सभा के सदस्य थे। उन्हें रियासत के प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया था। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए संविधान में आवाज उठाई । 1950 में वे कांग्रेस की ओर से सांसद मनोनीत हुए थे।

पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी: रायगढ़ निवासी पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी भी भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे। वे संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के भी सदस्य थे। बाल श्रम को रोकने तथा गांधी जी के ग्राम स्वराज के अनुरूप पंचायती राज स्थापना जैसे विषयों को शामिल करने में पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी की अहम भूमिका रही है।

Posted By: Ravindra Thengdi

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