रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्रदेश के 27 में से 18 जिलों में औसत से काफी कम बारिश हुई है। स्थिति यह है कि कुछ दिनों और अगर ऐसे ही रोजाना तेज धूप खिलती रही तो बीते दिनों हुई बारिश से धरती में जो नमी है, वह भी खत्म हो सकती है। यानी सूखे के हालात प्रबल हो सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि रायपुर में 21 जून से लेकर 21 जुलाई तक कुल 232.5 मिमी बारिश हुई है। मगर बारिश रुक - रुककर हुई।

10 दिनों के लिए मानसून ब्रेक हो गया। बीते हफ्ते भर से दिन में पारा 36-38 डिग्री के बीच है। यही वजह है कि जितनी बारिश हुई, लगभग उसके आधे से ज्यादा पानी वाष्पीकृत हो चुका है। रोजाना लगभग तीन से चार मिलीमीटर पानी वाष्पीकृत होने से नदी, तालाब, बांध का जल स्तर तेजी से घटते जा रहा है। चिंता इसलिए भी बढ़ रही है, क्योंकि मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि जुलाई में कोई बड़ा सिस्टम नहीं बन रहा है। यह तस्वीर रायपुर की है, मगर समूचे प्रदेश का कमोबेश हाल ऐसा ही है।

जुलाई में जहां चार सिस्टम बनने थे वहां तीन ही बने, लेकिन सिर्फ एक ही प्रभावी था। अब उम्मीद अगस्त, सितंबर से है। इस साल लोगों को महसूस ही नहीं हो रहा है कि यह बरसात का मौसम है, लग रहा है जैसे अप्रैल-मई है।

मैदानी इलाकों हालात बुरे- आंकड़ों के मुताबिक रायपुर शहर में बारिश कम है, अपेक्षाकृत आरंग, अभनपुर और अन्य क्षेत्रों के। राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर में औसत से 40 मिमी कम बारिश हुई है।

हर दूसरे साल कम हो रही बारिश-

'नईदुनिया' ने मौसम विभाग से बीते 10 सालों में जुलाई में हुई बारिश के आंकड़े जुटाए। 2009 में 640.3, 2010 में 481.4, 2011 में 380.7, 2012 में 644.8, 2013 में 569.5, 2014 में 564.5 मिमी बारिश हुई। इसके बाद आंकड़े बदलने शुरू हुए। 2015 में 228.0 मिमी बारिश हुई तो 2016 अच्छा रहा। 2016 में 463.3 मिमी बारिश हुई, 2017 में यह आंकड़ा गिरकर 152.9 मिमी पर जा पहुंचा। 2018 में स्थिति में सुधार हुआ और आंकड़ा 381.8 मिमी रहा। इस साल भी यही स्थिति बनी हुई है। हालांकि इसका कोई सटीक जवाब मौसम विज्ञानी नहीं दे पा रहे हैं।

क्या है मानसून द्रोणिका और उसका प्रभाव-

मौसम विशेषज्ञ पोषण लाल देवांगन के बताए अनुसार मानसून द्रोणिका के कारण ही मानसूनी बारिश होती है। जब यह हिमालय की तराई में चली जाती है तो मानसून ब्रेक की स्थिति बनती है, फिलहाल यह थोड़ा दक्षिण की तरफ झुकी हुई है। इसके कारण उत्तर प्रदेश, बिहार के कुछ हिस्सों में बारिश हो रही है। मध्य भारत में बारिश इसके ही मूवमेंट पर निर्भर है। फिलहाल स्थानीय सिस्टम की वजह से बारिश हो रही है। अभी तो कोई नया सिस्टम नहीं बन रहा है।

जिस प्रकार से तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है, धूप तेज है तो तेजी से पानी वाष्पीकृत हो रहा है। यह मानकर चलिए किए रोजाना तीन मिमी पानी वाष्पीकृत हो रहा है। इसे रोक नहीं सकते। चिंताजनक स्थिति है। -एचपी चंद्रा, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानी, लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र