रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ में एक सप्ताह से सिर्फ तिरंगा की बात हो रही है। कांग्रेस, भाजपा के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कोई देशभक्ति की बात कर रहा है तो कोई झंडे को लेकर विरोधियों पर निशाना साध रहा है। कुल मिलाकर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा मुद्दा इस समय झंडा की हो गया है। कोई भी दल झंडा की राजनीति में पिछड़ना नहीं चाहता है।

भाजपा हर घर तिरंगा अभियान चला रही है तो कांग्रेस तिरंगा लेकर पदयात्रा पर निकलने वाली है। कुछ भी हो, पक्ष-विपक्ष के नेता तिरंगा लेकर जब गांव में जाएंगे तो गांव के लोगों की समस्या भी सुनेंगे। चुनाव में अभी डेढ़ साल का समय है। ऐसे में दोनों दलों को अपनी कमजोरियों के बारे में पता चलेगा। संगठन भी यही चाहता है कि ग्राउंड रिपोर्ट उन तक पहुंचे, ताकि चुनाव की तैयारी की जा सके। देखना होगा, जनता से कितना फीडबैक मिलता है।

सावन में हर-हर महादेव

सावन में लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं। शिवालय में जल चढ़ाकर पुण्य की प्राप्ति करते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में सावन पर हर-हर महादेव की जगह 'महादेव किताब" की चर्चा है। यह आनलाइन सट्टा खिलाने वाली एक साइट है, जिसमें सटोरियों के लिए लाइन उपलब्ध कराई जाती है। दुर्ग जिले में इसकी पिछले दिनों खूब चर्चा थी, लेकिन अफसरों के बदलने के बाद जांच ठंडे बस्ते में चली गई।

पता चला है कि इसका छत्तीसगढ़ का काम एक करोड़पति पूर्व विधायक के बेटे ने अपने हाथ में ले लिया है। बात भगवान शिव की है तो ऋषि-मुनि तो आगे आएंगे ही। चर्चा है कि सिर्फ सावन में नेताजी के बेटे ने करोड़ों रुपये पीट दिए। इसका पता एक पार्टी में चला, जब नेताजी के पुत्र रंगीन माहौल में अपने दोस्तों से यह बात कर रहे थे। देखिए, कब तक नेताजी के बेटे सावन माह में हर-हर महादेव करते हैं।

चुनावी राजनीति में उतरने को उतावले अफसर

प्रदेश के एक दर्जन आइएएस, आइपीएस और पुलिस के अन्य अधिकारी चुनावी राजनीति में उतरने की तैयारी में हैं। हर अधिकारी अपनी चुनावी संभावनाओं को देखते हुए दल का चयन कर रहा है। बड़े अफसरों की पहली पसंद कांग्रेस तो है ही, लेकिन उनके पास आम आदमी पार्टी भी एक विकल्प के रूप में सामने आ रही है। एक आइएएस अधिकारी ने बताया कि उनसे दिल्ली आप के वरिष्ठ नेताओं ने संपर्क किया है।

सामान्य वर्ग से आने वाले अफसर से आप नेताओं ने कहा कि प्रदेश के उन अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराएं, जो ईमानदार हैं और राजनीति करना चाहते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि कांग्रेस में भले टिकट लेने वालों की भीड़ है, लेकिन आरक्षित सीट पर जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस को हार मिली है, वहां अधिकारियों की संभावनाएं बढ़ रही हंै। खुफिया तरीके से सरकार में बैठे लोग इन अधिकारियों की रिपोर्ट ले रहे हैं।

कांग्रेस विधायक का कनेक्शन

प्रदेश में कांग्रेस के एक युवा विधायक की चर्चा जोरों पर है। जिस तरह से आइटी और ईडी की कार्रवाई तेज हुई है, उसमें विधायकजी का नाम आ रहा है। एक मीडिया संस्थान में उन्होंने पैसों का निवेश किया है। पिछले चार साल में करोड़ों रुपये फूंक दिए। मीडिया संस्थान दिखने में भले ही छोटा हो, लेकिन उसके कारनामों की चर्चा बड़े-बड़े लोग कर रहे हैं। कई अधिकारियों के नाक में इस संस्थान ने दम कर दिया।

एक अधिकारी ने बताया कि विधायक के नाम पर धमकाने से लेकर वसूली तक का काम किया जा रहा है। सत्ताधारी दल का विधायक होने के कारण अधिकारी भी उनसे सीधे संवाद करने से बचते हैं। ऐसे में संस्थान में कार्यरत कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। अभी आइटी वाले आए थे। बताया जा रहा है कि आगे ईडी भी आएगी। आखिर ऐसे कर्म ही किए जा रहे हैं कि कार्रवाई होना तय है।

Posted By: Pramod Sahu

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