रायपुर। ईडी की छापामार कार्रवाई को लेकर रोज तरह-तरह की चर्चाएं शहर में हो रही हैं। इनमें सबसे खास यह है कि एक आइएएस के ठिकाने से मिले ढेरों दस्तावेजों ने कई राज खोले हैं। दरअसल दस्तावेजों को खंगालने पर मिले हिसाब-किताब के आधार पर एक जमीन दलाल को घेरे में लिया गया। बताया जा रहा है कि ईडी के अधिकारियों ने इस जमीन दलाल को मुर्गा बनाकर लंबी पूछताछ की। सख्ती के साथ की गई पूछताछ में जमीन दलाल ने कई ऐसे राज उगले कि खुद अधिकारी भी हैरान रह गए। दलाल ने जमीन खरीदी में पक्के और कच्चे का अंतर बताने के साथ ही करोड़ों रुपये आने और जाने के रास्ते की कहानी बताकर कई और सुराग दे दिए। इतनी तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही ईडी की कार्रवाई में धार आ गई। पुख्ता कागज ईडी के हाथ कैसे लगे, इसके पीछे का रहस्य फिलहाल बना हुआ है।

शराबबंदी की पहल

छत्‍तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर एक तरफ राजनीति गरमाई हुई है तो दूसरी ओर कुछ समाजसेवी आंदोलन, पदयात्रा तक कर रहे हैं। इन सबके बीच कोरबा जिले के ग्राम सलोरा (कटघोरा) में ग्रामीणों ने शराबबंदी की घोषणा कर अच्छा उदाहरण पेश किया है। दरअसल गांव में बच्चे भी नशे के शिकार हो रहे थे, जिसे रोकने के लिए शराबबंदी करनी पड़ी। गांव के हर कोने में महिलाएं नजर भी रख रही हैं। पंचायत ने शराब बेचते पाए जाने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का नियम बनाया है। साथ ही शराब बेचने वाले के बारे में बताने वालों को पांच हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा है। वहीं शराब खरीदने पर 10 हजार रुपये और गांव की सार्वजनिक जगहों या किसी भी समारोह में शराब पीते पाए जाने पर पांच हजार रुपये की जुर्माना राशि तय की गई है। देखना है कि सख्ती का कितना असर होता है।

आरडीए में सदस्य ने ही मांग ली जानकारी

जनहित से जुड़े मुद्दे को उठाना हर जनप्रतिनिधि का काम होता है। कुछ ऐसा ही आरडीए में हुआ है। आरडीए संचालक मंडल के एक मुखर सदस्य द्वारा अपनी ही संस्था में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाने को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। सवाल यह उठने लगा है कि आरडीए में मनोनीत पदाधिकारी को इसकी क्या जरूरत पड़ गई? वे चाहते तो अफसरों से ऐसे भी जानकारी मांग सकते थे, पर ऐसा नहीं किया। अधिकारी-कर्मचारियों को यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि ऐसी क्या विवशता रही कि सदस्य को आवेदन लगाना पड़ गया? फिलहाल इस विषय पर कोई भी खुलकर बोलने से बच रहा है। खुद सदस्य भी घर का मामला बताकर चुप हैं। बताया जा रहा है कि सूचना के अधिकार के तहत जमीन एवं आवास से जुड़े बिंदुओं, हितग्राहियों से ली जाने वाली रकम से संबंधित जानकारी मांगे जाने से हर कोई हैरत में है।

एक्शन में ईडी, धड़कन तेज

छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम की रुक-रुक कर चल रही धरपकड़ की कार्रवाई ने नौकरशाहों के साथ बड़े कारोबारियों और बिल्डरों की धड़कन बढ़ा दी है। एक आइएएस समेत चार लोगों के जेल भेजने के बाद आखिरकार पांचवीं गिरफ्तारी भी हो गई। वहीं दो-तीन लोग और निशाने पर हैं। अफसरों के साथ कई खनिज अधिकारियों और कोयला व्यापारियों से पूछताछ चल ही रही है। चर्चा है कि आने वाले दिनों में ईडी की कार्रवाई और तेज होगी। लिहाजा नौकरशाहों की नींद उड़नी लाजिमी है। हालांकि रडार पर कई राजनेता, मंत्री भी हंै। खनिज अधिकारियों पर पहले से शिकंजा कसा हुआ है। ईडी की आक्रामक कार्रवाई को भांपकर फिलहाल बड़े-बड़े मगरमच्छ शांत बैठकर अपनी खैर मना रहे हैं। लोग बचने के लिए भगवान का सुमिरन कर रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि गुजरात चुनाव निपटने के बाद ईडी के साथ ही आयकर विभाग भी एक्शन में आएगा।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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