Raksha Bandhan 2020 : रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इस बार का रक्षाबंधन कई अनोखे संयोगों के साथ आ रहा है। इस दिन यदि बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेंगी तो भाई का सौभाग्य बढ़ेगा। बहन की दुआ, आशीर्वाद से उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। कोरोना महामारी के चलते इन दिनों ट्रेन, बस बंद हैं और एक-दूसरे शहर से आवा-जाही पर प्रतिबंध लगा है। इसलिए भाइयों का बहनों के घर जाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में बहनें हनुमानजी और कान्हा को राखी बांधकर अपने भाई की सलामती, तरक्की की कामना करें। हालांकि इस दिन सुबह 9.28 बजे तक भद्रा है, लेकिन यह भद्रा पाताल लोक की होने से इसका असर नहीं रहेगा। बहनों को राखी बांधने में कोई अड़चन नहीं आएगी। सुबह से रात तक शुभ मुहूर्त है।

70 साल बाद सोम से शुरू सावन सोम को खत्म

लगभग 70 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब सोमवार 6 जुलाई को शुरू हुआ सावन महीना 3 अगस्त रक्षा बंधन के दिन सोमवार को ही समाप्त हो रहा है। साथ ही 30 साल बाद सात योग यानी समसप्तक योग का संयोग और 35 साल बाद त्रियोग यानी तीन अन्य योगों का भी संयोग है। ऐसे योग में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर दुआ मांगेंगी तो भाई के सौभाग्य में वृद्धि होगी।

ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार 3 अगस्त को पूर्णिमा तिथि पर सूर्य, शनि के सप्तक योग, प्रीति योग, सौभाग्य योग, आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, सोमवती पूर्णिमा, अंतिम सावन सोमवार, मकर राशि का चंद्रमा, श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग होने से विशेष फलदायी साबित होगी।

सुबह से रात तक शुभ मुहूर्त

- शुभ - सुबह 9.28 से 10.30 बजे

- चर - दोपहर 1.30 से 3 बजे

- लाभ - दोपहर 3 से 4.30 बजे

- अमृत - शाम 4.30 से 6 बजे

- चर - शाम 6 से 7.30 बजे

इन बातों का रखें ध्यान

- भाई के हाथ में पानी वाला नारियल पकड़ाकर राखी बांधें

- नारियल नहीं है तो कुछ रुपये और साबूत चावल हाथ में रखकर भी राखी बंधवा सकते हैं।

- श्रीफल वापस बहन को लौटा दें।

- बहन अपने हाथों से बनी मिठाई का भोग लगाएं।

- पूजा थाली में कुमकुम, चावल, नारियल, रक्षा सूत्र, मिठाई, दीपक, गंगाजल से भरा कलश रखें।

ब्राह्मण करेंगे श्रावणी उपाकर्म

इस दिन पूजा-पाठ, वेद शास्त्रों का पठन-पाठन करने वाले ब्राह्मण नदी में स्नान-ध्यान करके जनेऊ बदलेंगे और हवन-यज्ञ करेंगे।

भाई को ऐसे बांधें रक्षा सूत्र

ज्योतिषी स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती के अनुसार चावल के आटे से चौक पूरकर मिट्टी के छोटे कलश की स्थापना करें। चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एक साथ मिलाएं। पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं और मिठाई रखें। भाई को आम वृक्ष से बने पीढ़े पर पूर्व दिशा में बिठाएं और बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर हो। रक्षा सूत्र बांधते समय निम्न मंत्र का जाप करने से श्रेष्ठ फल मिलता है।

मंत्र- येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे माचलः माचलः

वैदिक रक्षा सूत्र ऐसे बनाएं

दूर्वा, अक्षत, केसर, चंदन, सरसों के दाने को रेशम के कपड़े में बांधकर सिलाई करें और कलावा में पिरो दें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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