Ram Mandir Bhoomi Pujan : रायपुर नईदुनिया प्रतिनिधि। भगवान श्रीराम के ननिहाल यानी छत्तीसगढ़ को किसी जमाने में कौशल प्रदेश के नाम से जाना जाता था। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महज 25 किलोमीटर दूर स्थित चंदखुरी गांव में विश्व का एक मात्र माता कौशिल्या का मंदिर है। अयोध्या में बुधवार को होने वाले श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन की खुशी मंगलवार को इस गांव के लोगों में दिखाई दी।

भले ही कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन में गांव की दुकानें बंद थीं, ग्रामीण घरों में थे, इसके बावजूद कई ग्रामीण मंदिर परिसर में बैठे अयोध्या में बनने जा रहे मंदिर की बातें करते दिखे। साथ ही मंदिर परिसर की सफाई और दीप सजाने की तैयारी में लगे थे। जब अयोध्या में बुधवार को भूमिपूजन होगा तब चंदखुरी मंदिर में सुंदरकांड, बालकांड और हनुमान चालीसा की चौपाइयां गूंजेंगीं। रात में मंदिर परिसर को दीपावली की तरह दीपों से रोशन किया जाएगा।

श्रीराम की तीनों माता के मंदिर

ग्रामीण कृष्ण कुमार वर्मा ने बताया कि पूर्वजों के अनुसार वनवास से लौटने के बाद श्रीराम को राजगद्दी सौंपकर माता कौशिल्या, माता कैकेयी और माता सुमित्रा अपने मायके कौशल प्रदेश चली गईं। माता कौशिल्या को चंदखुरी गांव अति प्रिय था, यहां सात तालाबों के बीच बने टापू पर वे तपस्या करने आतीं थीं। कालांतर में इसी टापू पर उनका मंदिर बना। गांव से कुछ किलोमीटर दूर नगपुरा गांव में माता कैकेयी और माता सुमित्रा के मंदिर हैं।

ग्रामीण मानते हैं भगवान को भांजा

ग्रामीण रामेश्वर प्रसाद बताते हैं कि चंदखुरी दण्डकारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता था। श्रीराम की माता की जन्मस्थली होने के कारण यह मंदिर प्रसिद्ध है। माता कौशिल्या मंदिर का जीर्णोद्धार 1973 में किया गया था। यह मंदिर जलसेन तालाब के मध्य में स्थित है। जलसेन तालाब लगभग 16 एकड़ में फैला है। मंदिर के गर्भगृह में मां कौशिल्या की गोद में बालरूप में भगवान श्रीरामजी की प्रतिमा है। पूरे गांव के लोग श्रीराम को अपना भांजा मानते हैं। अन्य प्रदेशों में भांजा अपने माता के पैर छूते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में मामा चाहे कितने भी बड़े हों, वह अपने से छोटे भांजे का पैर छूते हैं। यह परंपरा साबित करती है कि श्रीराम का ननिहाल छत्तीसगढ़ में था और वे हम सभी के भांजे हैं।

मंदिर के पुजारी गणेश शर्मा ने बताया कि अयोध्या में मंदिर बनने की खुशी पूरे गांव के लोगों में छाई है। इसी खुशी में बुधवार को मंदिर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया है। रात में सैकड़ों दीप प्रज्वलित कर प्रसाद बांटा जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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