रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

आज हर कोई चाहता है कि देश में राम राज्य कायम हो, लेकिन वास्तव में राम राज्य क्या है, इसे लोगों को समझना होगा। यदि भारत के गांव-गांव में निशुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाई जाए, बिना पैसे खर्च किए बीमारियों का इलाज आसानी से हो जाए। आम लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाए, यानी न्याय तुरंत मिल जाए तभी असली राम राज्य स्थापित हो सकता है। यह कहना है वृंदावन के संत रितेश्वर महाराज का। नईदुनिया से विशेष बातचीत में उन्होंने अनेक ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार रखे।

देश में एक सरीखा कानून हो, भेदभाव न हो

नागरिकता संशोधन बिल पर किए गए सवाल के जवाब में संतश्री का कहना था कि इस बिल का विरोध करने वाले मात्र राजनीति कर रहे हैं। विरोध होना ही नहीं चाहिए, क्योंकि यह दूसरे देश में रह रहे अल्पसंख्यकों के हित में है। इसमें हमारे देश का कोई नुकसान नहीं है। देश में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक सरीखा कानून होना चाहिए। जनसंख्या नियंत्रण कानून भी सभी के लिए बराबर होना चाहिए।

नारी उत्पीड़न पर तुरंत न्याय मिले

देश में बढ़ रही दुष्कर्म की घटनाओं पर संतश्री का कहना था कि किसी भी नारी के साथ अत्याचार, दुष्कर्म की घटना होने पर दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यदि सबूतों के अभाव में दोषी छूट जाए तो इससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है। न्याय प्रणाली ऐसी हो कि भुक्तभोगी को तुरंत न्याय मिले, अदालतों के चक्कर न लगाना पड़े।

पाश्चात्य संस्कृति के फेर में मुठ्ठी भर लोग

हजारों साल पुरानी सनातन संस्कृति का प्रभाव क्या खत्म हो रहा है, के सवाल पर संतश्री का कहना था कि हमारी संस्कृति अखंड थी, अखंड है और अखंड रहेगी। संस्कृति कभी खत्म नहीं हो सकती। विश्व के अनेक देश भारतीय संस्कृति से प्रेरित हो रहे हैं, कुछ मुठ्ठीभर लोग ही पाश्चात्य संस्कृति के फेर में पड़कर भारतीय संस्कृति की अवहेलना करते हैं, वैसे लोग पूरी तरह से न पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते हैं और न ही भारतीय संस्कृति का पालन कर पाते हैं। वे लोग एक तरह से खिचड़ी संस्कृति में जी रहे हैं। उन पर डिप्रेशन हावी हो रहा है। व्यक्ति को अपना चरित्र बेहतर रखना चाहिए। असली साधु वह है जो अपने को साध ले, माता-पिता का सम्मान करें।

राम मंदिर से मिलेगी आदर्शों पर चलने की सीख

अयोध्या में राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त होने पर खुशी जताते हुए कहा कि भव्य मंदिर बनना चाहिए। इससे भावी पीढ़ी को श्रीराम के आदर्शों के बारे में पता चलेगा। मंदिर बनाने के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का पालन करने की सीख भी बच्चों को देनी चाहिए। मंदिर बनने से रामचरित मानस को युवा पीढ़ी अच्छे से समझ पाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

fantasy cricket
fantasy cricket