रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश के सबसे बड़े पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मूल्यांकन कराने का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया है। हर पांच वर्ष में नैक से मूल्यांकन कराना अनिवार्य होता है। ऐसे में जिस दिन नैक के मूल्यांकन की तारीख खत्म होगी, उसके बाद से विश्वविद्यालय ग्रेड विहीन हो जाएगा। इसका असर छात्र-छात्राओं की डिग्री पर पड़ेगा।

यह तब स्थिति है जब राज्यपाल अनुसुईया उइके और उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल नैक से मूल्यांकन कराने के लिए कालेजों और विश्वविद्यालयों को लगातार प्रेरित कर रहे हैं। जब प्रदेश का विश्वविद्यालय ही नैक से मूल्यांकन नहीं कराएगा तो बाकी कालेजों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं। कुलपति डा. केशरीलाल वर्मा ने कहा कि अभी हम विश्वविद्यालय की अधोसंरचना के विकास पर काम कर रहे हैं। बताया जाता है कि कार्यपरिषद में एजेंडा लाकर मूल्यांकन को फिलहाल स्थगित किया गया है। दिसंबर 2022 से नैक की ग्रेडिंग की अवधि खत्म हो जाएगी।

पिछली बार 3.02 सीजीपीए के साथ मिली थी ए ग्रेड

पिछली बार नवंबर 2016 में विश्वविद्यालय ने नैक से मूल्यांकन कराया था। उस समय विश्वविद्यालय को 3.02 सीजीपीए के साथ ए ग्रेड मिली थी। प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जून 2022 तक सभी कालेजों को नैक से मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय ने सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) जमा कर दी है। इसके बाद भी मूल्यांकन नहीं कराने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। चर्चा है कि कुलपति डा. केशरीलाल वर्मा का कार्यकाल मार्च 2023 में खत्म हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुलपति दोबारा इस पद पर वापसी की कोशिश में हैं। यदि नैक द्वारा मूल्यांकन होता है और विश्वविद्यालय वर्तमान ए ग्रेड बचा नहीं पाया तो दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।

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नैक की बताई कमियां नहीं हुईं दूर

पिछली बार नैक ओर से बताई गई कमियों को दूर नहीं किया जा सका है। कैंपस में वाई-फाई नहीं है, विश्वविद्यालय सेमिनार कराने के मामले में पीछे है। सेमिनार में .5 इंडेक्स से नीचे है, जबकि बेहतर ग्रेड के लिए कम से कम इंडेक्स एक जरूरी है। सोशल साइंस के रिसर्च पेपर स्टैंडर्ड नहीं हैं। इनका प्रकाशन बेहद कमजोर है। नए-नए कोर्स खोलने की जरूरत है। नैक ने फैकल्टी की कमी को अहम माना है। सबसे अधिक एकेडमिक कमी है। इसे पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय को सरकार का सपोर्ट जरूरी है। कुलपति ने भी माना है कि फैकल्टी कम होने से परेशानी है। अभी 67 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया होनी है। विश्वविद्यालय की कंसल्टेंसी कमजोर है। इसके अलावा एल्युमिनी का कंट्रीब्यूशन बेहद कम है। विदेशी संस्थानों के साथ अनुबंध कम है। विदेशी संस्थानों से कम कम से 15 अनुबंध के साथ अनुसंधान में भी सहयोग होना चाहिए। प्लेसमेंट सेल कमजोर है और स्टूडेंट्स को करियर गाइडेंस नहीं मिल रहा है।

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एक्सपर्ट व्यू

ग्रेड बरकरार नहीं रहता है

जहां तक मुझे जानकारी है, जिस तारीख से ग्रेडिंग की तिथि खत्म होती है उसके बाद ग्रेड बरकरार नहीं रहता है। हालांकि विश्वविद्यालय ने सेल्फ स्टडी रिपोर्ट जमा कर दी है। इसका मतलब है कि तैयारी पूरी हो चुकी है। नैक से ग्रेडिंग करा लेना चाहिए।

- डा. शिव कुमार पांडेय, पूर्व कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर

वर्जन...

नैक के मूल्यांकन को लेकर कार्यपरिषद ने क्या निर्णय दिया है, यह मैं नहीं बता सकता। इस संबंध में कुलपति से बात कर लीजिए।

- शैलेंद्र पटेल कुलसचिव, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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