रायपुर। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के मुस्लिम समुदाय के संबंध में दिए गए बयान को बॉलीवुड अभिनेता रजा मुराद ने भी हवा दे दी है। सोमवार को राजधानी पहुंचे रजा मुराद ने 'नईदुनिया" से खास बातचीत में यह कहकर बहस छेड़ दी कि तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने तजुर्बे के आधार पर ही बयान दिया होगा। उन्होंने बयान दिया था कि देश के मुस्लिम समुदाय में है घबराहट-असुरक्षा का माहौल है।

उल्लेखनीय है कि रजा मुराद राजधानी में ईरा फिल्म्स की भोजपुरी फिल्म मिल गईली चंदनिया की शूटिंग में आए हैं। फिल्म दिवाली पर रिलीज होगी। भोजपुरी फिल्म के बाद यह फिल्म छत्तीसगढ़ में भाषा में रिलीज होगी। उनसे की गई बातचीत के अंश पेश हैं।

सवाल- पूर्व उपराष्ट्रपति ने जाते-जाते जो मुस्लिम समुदाय को लेकर बयान दिया है, उसे आप किस नजरिए से देखते हैं?

जवाब- पूर्व उपराष्ट्रपति ने जो बयान दिया है, कहीं न कहीं उन्होंने अपने 10 वर्ष के कार्यकाल और तजुर्बे के आधार पर दिया है। अब यह लोगों को समझने की बात है कि आखिर उन्होंने ऐसी बात क्यों कही? इससे पहले उस समय के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी नसीहत दी थी, लेकिन तब किसी ने ध्यान नहीं दिया।

सवाल- आपका किरदार फिल्मों में हमेशा विलेन का और निगेटिव रहा है। क्या इसका असर आपके व्यक्तिगत जीवन पर भी है?

जवाब- 100 फीसदी पॉजिटिव सोच वाला व्यक्ति हूं। रोल भले ही निगेटिव, लेकिन पूरी तरह से पॉजिटिव हूं। फिल्मों में निगेटिव रोल भले ही करता रहा हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं निगेटिव माइंडेड हैं। निगेटिव रोल कर लोगों को सीख देते हैं। निगेटिव रोल का एक और सबसे बड़ा फायदा यह है कि सारा गुस्सा फिल्म में ही निकल जाता है।

सवाल- बॉलीवुड फिल्मों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। इसकी वजह क्या मानी जा सकती है?

जवाब- मौजूदा दौर की फिल्मों में पूरी तरह से बदलाव आ गया है। लोग केवल पैसा कमाने में लगे हैं। अब वे दिन गए, जब मदर इंडिया जैसी फिल्में आएं।

सवाल- क्षेत्रीय फिल्मों को लेकर एक्टर्स और सरकार को किस ओर मदम उठाना होगा?

जवाब- हिंदी फिल्मों तक पहुंचने का रास्ता काफी कठिन है, लेकिन क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा देने सरकार को पूरी मदद करनी चाहिए। फंडिंग से लेकर उनकी सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करवानी चाहिए। साथ ही टैक्स फ्री कर देना चाहिए। क्षेत्रीय फिल्मों में लोगों की भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है वे सिनेमा जाएं और फिल्म देखें।

सवाल- गानों में री-मिक्स की क्या भूमिका है?

जवाब- आज के गानों में यह पता ही नहीं चलता कि कौन क्या गा रहा है। पहले के हर गाने की हर लाइन का कोई मतलब होता था। आज हमारे बच्चे जब अंताक्षरी गाते हैं तो पुराने गाने ही शामिल होते हैं। आज शब्दों में भी गिरावट आ गई है।

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