आनंदराम साहू, रायपुर। Republic Day Celebrations : छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहनें और शिल्प को अब पूरा देश-दुनिया देखेगी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर नईदिल्ली के राजपथ पर झांकी में इसका प्रदर्शन होने जा रहा है। राष्ट्रीय पर्व के मुख्य समारोह में प्रदर्शित होने वाली विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियों में इस बार छत्तीसगढ़ की झांकी सबसे पहले क्रम पर होगा। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहनें और शिल्प पर आधारित झांकी का चयन रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति द्वारा किया गया है। कई दौर के परीक्षण और रिहर्सल के बाद देशभर के 29 राज्यों की 58 प्रस्तावों में से 22 झांकियों का चयन राजपथ पर प्रदर्शन के लिए हुआ है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच प्रदर्शन के लिए चयन हुआ।

सबसे पहले क्रम पर छत्तीसगढ़ की झांकी होने से कलाकारों और तैयारी में जुटे अफसरों में खासा उत्साह है। झांकी प्रस्तुति की तैयारियों का जायजा लेने जनसंपर्क विभाग के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा भी नईदिल्ली पहुंचे हैं। नईदुनिया से खास बातचीत में उन्होंने इस पर प्रसन्न्ता जाहिर की।

राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में बन रहे झांकी का उन्होंने शनिवार को अवलोकन किया। सिन्हा ने बताया कि जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक संजीव तिवारी और उपसंचालक सुनील सिंह के संयोजन में 'छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहने और शिल्प" थीम पर इस बार विशेष झांकी बनाई गई है। जिसे चयन समिति ने 22 झांकियों में अव्वल क्रम पर रखा है।

यह छत्तीसगढ़वासियों के लिए गर्व और गौरव की बात है। इससे निश्चय ही छत्तीसढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, गहनें और यहां की शिल्पकला को न केवल देशभर के लाखों लोग बल्कि विदेश से आए मेहमान भी करीब से देख सकेंगे। गौरतलब है कि इस साल भारत के 71वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो होंगे।

गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी 2020 को राजपथ से ये झांकियां गुजरेंगी। छत्तीसगढ़ की झांकी के सामने नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ का नर्तक दल ककसार नृत्य करके लोक गीत और संगीत से ओतप्रोत प्रस्तुति देंगे। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी अंचल नारायणपुर से दिल्ली में डेरा जमाए 20-22 आदिवासी कलाकारों की टोली 4-5 डिग्री की ठिठुराने वाली ठंड में भी नियमित अभ्यास कर रही है। रक्षा मंत्रालय के टेंट में कड़ी सुरक्षा के बीच रिहर्सल करके राजपथ पर प्रस्तुति देने तैयार हैं।

यह है ककसार नृत्य की विशेषता

ककसार नृत्य छत्तीसगढ़ राज्य के नारायणपुर जिले की अबूझमाड़िया जनजाति द्वारा किया जाने वाला एक सुप्रसिद्ध नृत्य है। यह नृत्य फसल अच्छा होने पर और वर्षा के देवता 'ककसार" की पूजा के उपरांत किया जाता है। ककसार नृत्य के साथ बस्तरिहा संगीत और घुँघरुओं की मधुर ध्वनि से एक रोमांचक वातावरण उत्पन्न् होता है। इस नृत्य के माध्यम से अबूझमाड़, बस्तर में युवक और युवतियों को अपना जीवनसाथी ढूँढने का अवसर भी प्राप्त होता है।

कठिन प्रक्रियाओं से गुजरकर होता है चयन

रक्षा मंत्रालय की निगरानी में झांकियों की प्रस्तुति होती है। छत्तीसगढ़ की झांकी का वर्ष 2019 में चयन नहीं हो पाया था। इससे इस साल और बेहतर करने की ठान कर तैयारी की गई। हरेली पर्व, राजिम माघी पुन्न्ी मेला और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की थीम की प्रारंभिक प्रस्तुति हुई थी। जिसे नकार दिया गया। तब छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गहनें और शिल्प पर आधारित थीम की प्रस्तुति दी गई। जिस पर चयन कमेटी ने सहमति दी।

तीन बार डिजाइन बना, माडल राउंउ में गया, थ्री डी माडल और म्यूजिक का प्रजेंटेशन हुआ। बाद फाइनल स्तर पर 16 राज्य और 6 मंत्रालयों की झांकी का मिलाकर कुल 22 झांकियों का चयन हुआ। और अंतत: छत्तीसगढ़ की झांकी पहले क्रम के लिए चयन हुआ। सफलता मिलने से कलाकार और अफसर सभी उत्साहित हैं।

कड़ी प्रतिस्पर्धा में महाराष्ट्र, बिहार, केरल,पश्चिम बंगाल, दिल्ली आदि अनेक राज्यों की झांकियां प्रदर्शन से बाहर हो गई। 23 जनवरी को अंतिम रिहर्सल और प्रस्तुति के लिए झांकी को तैयार करने युद्धस्तर पर काम चल रहा है। राष्ट्रपति भवन और पीएमओ में भी छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के लोकनर्तक ककसार नृत्य की प्रस्तुति का अंतिम रिहर्सल दिखाएंगे।

चार बार पुरस्कृत हो चुकी है छत्तीसगढ़ की झांकी

गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह में राजपथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी अब तक चार बार पुरस्कृत हो चुकी है। एक नवंबर 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया। इसके बाद सबसे पहले वर्ष 2006 में छत्तीसगढ़ की झांकी को प्रथम पुरस्कार मिला था। तब भी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक आभूषणों पर आधारित झांकी की प्रस्तुति हुई थी। वर्ष 2010 में तृतीय पुरस्कार मिला। तब कुटुमसार गुफा को आकर्षक झांकी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया था।

वर्ष 2013 में एक बार फिर तृतीय पुरस्कार छत्तीसगढ़ की झांकी को मिला। तब छत्तीसगढ़ की अनमोल धरोहर सिरपुर पर केंद्रित झांकी की प्रस्तुति खूब सराही गई थी। सिरपुर के विश्व विख्यात लक्ष्मण मंदिर को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया था। गौरतलब है कि सिरपुर को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का प्रयास हो रहा है।

वर्ष 2018 में एक बार पुन: तृतीय पुरस्कार छत्तीसगढ़ की झांकी को मिला। इस बार रामगढ़ की पहाड़ियों में स्थित भारत की प्राचीन नाट्यशाला पर आधारित झांकी प्रदर्शित की गई थी। जिसमें रामगढ़ की पहाड़ियों में महाकवि कालीदास द्वारा रचित मेद्यदूत को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया था।

वर्ष 2015 के गणतंत्र दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की झांकी में एशिया के सबसे पुरातन विश्व विद्यालयों में से एक इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कलात्मक भवन और यहां के कला और संगीत की विभिन्न् विधाओं का प्रदर्शन हुआ था। विश्वविख्यात इस विश्वविद्यालय की झांकी को पुरस्कार नहीं मिला पाया था। लेकिन जमकर सराहना हुई थी।

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