रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

राजधानी रायपुर में 2019 का नगरीय निकाय चुनाव हाई वोल्टेज का होने वाला है। इसका बिगुल परिसीमन के दिन ही बज गया था, जब पांच-10 और 20 साल से भी ज्यादा समय से वार्डों के एक-एक मतदाता का विश्वास जीतने वाले पार्षदों के वार्ड छोटे-बड़े हो गए। अब आज आरक्षण की घड़ी है। रायपुर नगर निगम में महापौर सीट पर किस वर्ग का आरक्षण होगा, इस पर सबकी निगाहें हैं। ज्यादा संभावना महिलाओं की ही नजर आ रही है। महिला आरक्षण या महिला ओबीसी। हां, पुरुष ओबीसी की भी संभावना है। बीते दो चुनावों में इन वर्गों का आरक्षण नहीं हुआ है। सारी प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम से होगी। किसकी किस्मत का ताला खुलेगा, ये कोई नहीं जानता। इसलिए इंतजार ही विकल्प है।

बता दें कि दिग्गज पार्षदों की महापौर पद पर दावेदारी है। 'नईदुनिया' ने पूर्व में ही खबर प्रकाशित कर मुद्दे को उठाया था। वहीं इनके लिए आज का दिन अहम है। बात पार्षद पद के आरक्षण की करें तो वह निकायों के महापौर पद के आरक्षण पूरा होने के बाद होगा। आरक्षण होते ही, सभी दिग्गज टिकट के जुगाड़ में लग जाएंगे। आरक्षण इनके पक्ष में हुआ तो खुद लड़ेंगे, नहीं हुआ तो पत्नी, बेटा-भतीजा या फिर अपने कार्यकर्ता को टिकट दिलाने में जुटेंगे।

--------------------

ये भी जरूर समझें

2009 और 2014 में डॉ. रमन सिंह की सरकार थी। मगर इन दोनों ही बार रायपुर की सत्ता पर भाजपा का कब्जा नहीं हो सका। भाजपा के महापौर पद के प्रत्याशी हारे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी रही कि महापौर पद के प्रत्याशियों को तत्कालीन विधायकों, पार्षद पद के प्रत्याशियों का पूरा समर्थन नहीं मिला। मगर अब परिस्थितियां उलट है। प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस है।

जानकारों के मुताबिक ऐसे होगी आरक्षण की प्रक्रिया-

निकाय चुनाव और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार 2009 के चुनाव में महापौर पद के लिए महिला सामान्य सीट का आरक्षण हुआ। भाजपा ने प्रभा दुबे और कांग्रेस ने डॉ. किरणमयी नायक को मैदान में उतारा। डॉ. किरणमयी ने जीत दर्ज की। 2014 में पुरुष सामान्य सीट हुई। महापौर पद के लिए भाजपा ने सच्चिदानंद उपासने पर दाव खेला तो कांग्रेस ने पार्षद प्रमोद दुबे पर। दुबे ने एक बार फिर कांग्रेस को जीत दिलाई दी। अगर इस बार पूर्व के इन आरक्षणों की पर्चियों को अगर शामिल नहीं किया जाता है तो महिला, ओबीसी पुरुष या ओबीसी महिला आरक्षण हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो पार्टियों में दावेदारों की कमी नहीं है।