Rice Of Chhattisgarh : रायपुर । धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में सुगंधित और औषधीय गुणों वाले चावल की पैदावार का रकबा बढ़ने लगा है। यह विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है। पैदावार बढ़ाने के लिए प्रदेश सहित रायपुर के आरंग ब्लांक में जैविक खेती शुरूआत की गई है। पिछले पांच वर्षों में 14 जिलों में चर्चित जैविक चावल पैदा होने लगा है। सात औषधीय चावल की मांग देशभर में है।

तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले में जिस प्रकार से लोगों की भीड़ जैविक व्यंजनों के स्टॉल पर थी, उससे कृषि विभाग रायपुर के अधिकारियों का हौसला बढ़ा है। सुगंधित के साथ औषधीय चावल को इसलिए पसंद किया जा रहा क्योंकि रेड राइस, ब्लैक राइस, ग्रीन राइस में एनिमिया, सिकलिन, कुपोषण जैसे कई रोगों को दूर करने की क्षमता है। इनकी अन्य राज्यों में सप्लाई की जा रही है।

तीन दिन में 3 लाख रुपये की कमाई

राष्ट्रीय कृषि मेला तुलसी-बाराडेरा में किसान समूहों ने तीन दिन में लगभग साढ़े तीन लाख रुपये का चावल बेचा। सरगुजा जिला के समूहों ने 80 हजार रुपए का ब्लैक राइस बेचा। राजनांदगांव एवं बालोद के आत्मा समूह ने 10 हजार रुपये का रेड राइस बेचा। कई लोग 10 से 15 किलो के पैकेट खरीद कर ले गए। जैविक चावल की मांग बढ़ने से इसकी खेती करने वाले किसान उत्साहित हैं।

रायपुर समूह की आय डेढ़ लाख

जैविक व्यंजन में कृषि विभाग के कुल 18 समूहों का स्टॉल लगा था। समूहों को विभाग की तरफ से 2 लाख रुपये का सहयोग दिया गया था। अकेले रायपुर समूह ने जैविक व्यंजन बेचकर एक लाख 58 हजार स्र्पये की कमाई की। इसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

औषधीय धान की प्रमुख प्रजाति

चावल का नाम गुण और लाभ

ब्लैक राइस- एंथोसायनिन,एंटीआक्सीडेंट

रेड राइस- एनिमिया, सिकलिन, कुपोषण

ग्रीन राइस- एंटी कैंसर, मोटापा, एंटी आक्सीडेंट

जिंक राइस- कुपोषण

मधुराज- मधुमेह

दावर- कुपोषण, प्रसूति

साटका- कुपोषण, एनिमिया

चर्चित जैविक ब्राण्ड जिला में

रायपुर- आर्गेनिक्स रायपुर

शिवनाथ- आर्गेनिक दुर्ग

महामाया- जैविक उत्पाद सरगुजा

एग्रोफ्रेश कोरबा

चांग्रो राइस बलरामपुर

बांसाझाल राइस सरगुजा

नेचर्स पैराडाइस कबीरधाम

आगर जैव उत्पाद मुंगेली

रूद्र नेचुरल धमतरी

एग्रोफ्रेश जशपुर

पंचतत्व ब्रांड कोण्डागांव

आदिम ब्रांड दंतेवाड़ा

बस्तर नेचुरल बस्तर

केलो ब्रांड रायगढ़

- औषधीय व सुंगधित चावल की बढ़ी मांग से किसानों की आय बढ़ेगी। इससे किसान रासायनिक खादों का उपयोग करने के बजाय जैविक फसल की तरफ बढ़ेंगे। - आरएल खरे, उपसंचालक कृषि-रायपुर

Posted By: Anandram Sahu