रायपुर। बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) आपके शोध को पहचान देता है। आप जो भी आविष्कार करते हैं या रचना करते हैं उस पर आपको हक बनाता है। इसमें आपका पूरी तरह से अधिकार हो जाता है। इस अधिकार की जानकारी हमारी बौद्धिक क्षमताओं से उपजी किसी भी कृति को चोरी होने से और उसके गलत इस्तेमाल से भी बचाती है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी बौद्धिक संपदा को सुरक्षित करना चाहिए।

यह कहना है पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के विधि विभाग की प्रोफेसर डा. प्रिया राव का। बता दें कि डा. राव को हाल ही में विधि के क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने को लेकर राज्य अलंकरण पुरस्कार से भी नवाजा गया है। उन्होंने राजधानी के शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय में बौद्धिक संपदा के अधिकार पर बातें रखी। उन्होंने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर आविष्कारक को हर रचनाकार, लेखक, वैज्ञानिक और हर शिक्षाविद को इस अधिकार की जानकारी होनी चाहिए ताकि वे अपनी कृतियों को पेटेंट, कापीराइट या ट्रेडमार्क करवा कर उस पर सदा के लिए अपना अधिकार जता सकें।

शिक्षित-अशिक्षित कोई भी करा सकता है पेटेंट

डा. राव ने पेटेंट पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्तियों को उनके बौद्धिक सृजन पर प्रदान किया जाने वाला अधिकार ही बौद्धिक संपदा अधिकार होता है। कोई व्यक्ति किसी प्रकार का बौद्धिक सृजन जैसे साहित्यिक कृति की रचना, शोध, आविष्कार आदि करता है तो इस पर उसी व्यक्ति का अनन्य अधिकार होना चाहिए। यह अधिकार उसे मिलता भी है। उन्होंने बताया कि अपने शोध या आविष्कार को लेकर कोई भी व्यक्ति पेटेंट करा सकता है। इसके लिए शिक्षित होना जरूरी नहीं होता है। एक अनपढ़ आदमी भी अपने आविष्कार को पेटेंट करा सकता है।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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