रायपुर। Raipur News: शास्त्रीय संगीत की महफिल रविवार को सजी। कोरोना संक्रमण की वजह से आनलाइन महफिल सजी, जिसमें गायन और वादन की प्रस्तुतियों ने सबको मोहित किया। आनलाइन कार्यक्रम देखने वालों ने खूब दाद दी। उभरते कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा और कला प्रेमियों को लुत्फ मिल रहा है।

कोरोना महामारी के दौरान से मंच पर प्रस्तुतियां बंद है। संगीत रसिकों को संगीत का आनंद देने और शास्त्रीय गायकों की प्रतिभा को निखारने के लिए आनलाइन मंच उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को 30वां शास्त्रीय गायन, वादन का आयोजन किया गया।

गुनरसपिया फाउंडेशन की 30वीं संगीत सभा में रविवार को आनलाइन संगीत सभा में दुर्गापुर-पश्चिम बंगाल के युवा कलाकार ऋषव चक्रवर्ती ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। प्रख्यात गायक पद्मश्री उस्ताद राशिद खां के शिष्य रामपुर सहसवान घराने के गायक ऋषव चक्रवर्ती शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम है। ऋषव ने अपने गायन की शुरुआत राग-बिलसखानी तोड़ी में मध्यलय तीनताल की बंदिश 'काहे करत मोसे झगड़ा..." से की।

उन्होंने मध्यलय त्रिताल की बंदिश 'जा रे जा रे खगवा...' की सुंदर प्रस्तुति दी। इसके बाद 'राग-पटदीप' ताल-तीनताल में 'सुनलो हमारी ख्वाजा...' द्रुत एकताल में 'रंग रंगीला बनरा मोरा...' और राग-पहाड़ी में 'बातों बातों में बीत गई रात, ताल-दादरा' की प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का समापन राग-भैरवी, ताल-अद्धा तीनताल में निबद्ध ठुमरी 'आज राधा बृज को चली...' से किया।

Posted By: Shashank.bajpai

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags