रायपुुर। Raipur Local Edit: छत्तीसगढ़ में 2019 की तुलना में 2020 में अपराध बढ़े हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्ष राज्य में 65,216 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए, जो 2019 में दर्ज मामलों की तुलना में 3,960 अधिक हैं। छत्तीसगढ़ की पहचान शांतिप्रिय राज्य के रूप मेंं है। इस राज्य को राष्ट्रीय परिदृश्य में भले ही पिछड़ा हुआ, नक्सल प्रभावित कहा जाता हो, लेकिन यहां की जनता अनुशासनप्रिय और कानूनप्रिय है।

ऐसे में अपराध के ये आंकड़े चिंतित और विचलित करते हैं। यह चिंता इसलिए भी है कि 2018 में दर्ज आपराधिक प्रकरणों की तुलना मेंं 2019 में भी मामले बढ़े। कहने का आशय साफ है कि हर साल राज्य में अपराधियों की सक्रियता बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ में बदहाल होती कानून व्यवस्था के बीच चिंता की बात यह भी है कि जिम्मेदार और निर्णय लेने में सक्षम राजनीतिक पार्टियां बस आंकड़ों की बाजीगरी से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं।

आंकड़ों के अनुसार आपराधिक मामले में राज्य की स्थिति उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, असम जैसे राज्यों के बाद 14वें स्थान पर है। यहां आबादी के अनुपात में अपराध के आंकड़े अधिक हैं। राज्य में बढ़ते आपराधिक मामलों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की गतिविधियां बढ़ाने, मजबूत पेट्रोलिंग की जरूरत है। वारदात के बाद जितनी तेजी से अपराधियों की धरपकड़ होती है, उतनी ही तेजी से अपराध नियंत्रित होता है।

स्वजनों के बीच तेजी से बढ़ते अपराध को देखते हुए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी नियमित काउंसिलिंग जरूरी है। राज्य में ज्यादातर अपराध की वजह शराब और बेरोजगारी है। मनरेगा से ग्रामीण क्षेत्रों मेंं समय विशेष पर रोजगार उपलब्ध कराकर लोगों का पलायन रोकने की कोशिश होती है, लेकिन यह प्रयास नियमित रोजगार की दृष्टि से अपर्याप्त है। इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर अधिक परिणाम मूलक काम करना होगा। छत्तीसगढ़ दुष्कर्म और महिलाओं से मारपीट के मामले में भी आगे है।

छत्तीसगढ़ की गिनती देश में सर्वाधिक अपराध वाले राज्यों के रूप में होने लगे, इससे पहले शासन-प्रशासन से लेकर सामाजिक- राजनीतिक संस्थाओं को भी अपनी भूमिका प्रभावी करनी होगी। नक्सल हिंसा के मामले में भी राज्य का स्थान आठ पर है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में 533 दर्ज नक्सल प्रकरणों में से सर्वाधिक 296 मामले छत्तीसगढ़ के हैं। हम लगातार बस्तर क्षेत्र में घटते नक्सल प्रभाव की बातें करते हैं, जबकि इस दिशा में बहुत कुछ करने की जरूरत है।

दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों से आत्मसमर्पण करवाने की घर वापसी योजना को बाकी नक्सल प्रभावित जिलों में भी संजीदगी से लागू करने और नक्सलगढ़ में अधिकाधिक रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महाराष्ट्र-आंध्र प्रदेश की तरह ही और भी बेहतर सर्चिंग प्लान की जरूरत है, ताकि नक्सलियों को उनकी मांद में दबोचा जा सके।

Posted By: Shashank.bajpai

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