रायपुर। शराबबंदी के लिए बनी प्रशासनिक समिति की बुधवार को पहली बैठक हुई। इसमें प्रारंभिक तौर पर शराबबंदी के लिए रोडमैप तैयार किया गया। यह तय हुआ है कि जनजागस्र्कता लाकर शराब की डिमांड कम की जाए। डिमांड कम होगी, तो सप्लाई भी अपने आप कम होती जाएगी। बैठक में शराबबंदी के बाद सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए गुजरात, बिहार और ओडिशा दौर पर जाने को लेकर भी चर्चा हुई। आबकारी आयुक्त और समिति के अध्यक्ष निरंजन दास ने कहा कि एक माह के भीतर दौर पर जाने की कोशिश रहेगी।

नवा रायपुर अटलनगर के आबकारी भवन में आबकारी आयुक्त की अध्यक्षता में प्रशासनिक समिति की बैठक हुई, जिसमें पद्मश्री फूलबासन बाई, पद्मश्री शमशाद बेगम, सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा शर्मा और विधायक कुंवर निषाद व संगीता सिन्हा भी उपस्थित थे। सभी ने कहा कि एक झटके में शराबबंदी करने से सामाजिक और आर्थिक नुकसान हो सकता है।

शराब पीने वालों की मृत्यु भी हो सकती है। इस कारण पहले जनजागस्र्कता जस्री है। शमशाद बेगम शराबबंदी के लिए गठित महिला कमांडो की प्रमुख भी हैं, उन्होंने कहा कि जनजागस्र्कता में महिला कमांडो सहयोग करेंगे। 14 जिले में 65 हजार महिला कमांडो हैं।

जनजागस्र्कता में एनजीओ की भी मदद लेने की बात कही गई। यह सुझाव भी आया कि केवल शराब ही नहीं, तंबाखू और दूसरे नशे के खिलाफ भी प्राथमिक कक्षाओं से पढ़ाया जाए। प्रशासनिक समिति में महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग को भी जोड़ने का सुझाव आया। बैठक में 11 बिंदुओं पर चर्चा हुई।

पीड़ित परिवार के कल्याण पर राजस्व खर्च करें

समिति के लोगों ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में शराब से चार हजार करोड़ का राजस्व मिला था। शराब से होने वाली आय को नशामुक्ति अभियान और शराब छोड़ने वाले गरीब लोगों के परिवार के कल्याण में खर्च किया जाना चाहिए।

पुरानी समिति की रिपोर्ट खारिज, राज्यों का फिर होगा दौरा

पूर्ववर्ती सरकार ने शराबबंदी के लिए कमेटी बनाई थी, वह गुजरात, बिहार, दिल्ली, पांडिचेरी समेत कुछ और राज्यों के दौरे पर गई थी। उसने रिपोर्ट भी दिया था। आबकारी अधिकारियों का कहना है कि उस समिति ने शराब दुकान और भट्ठी बढ़ाने का सुझाव दिया था, इसलिए उसकी रिपोर्ट खारिज कर दी गई है। अब नई समिति राज्यों के दौरे पर जाएगी। गुजरात व बिहार में शराबबंदी के बाद क्या हालात बने और ओडिशा में शराबबंदी के बाद फिर से शराब की बिक्री क्यों शुरू करनी पड़ी, इसका अध्ययन किया जाएगा।