रायपुर। RTE Admission Chhattisgarh: स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही से छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों का दाखिला नहीं हो पाया है। निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर दाखिला दिलाने के लिए अभिभावक भटक रहे हैं और आज तक विभाग ने लाटरी नहीं निकाली है। प्रदेश के 28 जिलाें में 6,619 स्कूलों में 83,663 सीटें आरक्षित हैं। सीटों के मुकाबले इस बार महज 67, 789 ही आवेदन आए हैं। आरटीई के तहत बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में होता है और इन स्कूलों का सत्र एक अप्रैल से ही शुरू हो चुका है। यहां आनलाइन पढ़ाई जारी है और यहां चार महीने के बाद भी बच्चों का दाखिला कराने में अफसर लापरवाही दिखा रहे हैं। अभिभावक संघ का कहना है कि आरटीई की फीस सरकार को देनी होती है इसलिए देर की जा रही है ताकि अभिभावक मजबूरी में किसी अन्य स्कूल में अपने बच्चों का नाम लिखवा लें। आरटीई के तहत पहले से ही तीन लाख से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं।

सोमवार से खुल रहे हैं स्कूल, दाखिला होगा बाद में

सोमवार से स्कूल-कालेज खुलने जा रहे हैं लेकिन स्कूल खुलने के बाद ही आरटीई में दाखिला दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला के मुताबिक जल्द ही दाखिले के लिए प्रकि्या शुरू हो जाएगी। छह से आठ अगस्त तक राज्य स्तर पर दाखिले के लिए लाटरी निकाली जाएगी। इसके पहले चार अगस्त तक आवेदन करने का मौका भी दिया गया है।

इसके बाद पांच अगस्त को दस्तावेज सत्यापन कार्य होगा। नौ से 15 अगस्त तक बच्चों का स्कूलाें में दाखिला कराया जाएगा। बतादें कि निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर दाखिला दिलाने के लिए अभिभावक भटक रहे हैं और आज तक विभाग ने लाटरी नहीं निकाली है। वहीं कोरोना के चलते कुछ जगहों पर स्कूल खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। पिछले सात दिनों के भीतर प्रदेश में केवल सुकमा में 1.08 प्रतिशत कोरोना पाजिटिविटी रेट है। बाकी जगहों पर गाइडलाइन के अनुसार पाजिटिविटी रेट एक प्रतिशत से कम है फिर भी स्कूल खोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

Posted By: Kadir Khan

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