बिलासपुर (निप्र)। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में चुनावी व्यूह रचना बनाने और जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल की अगुवाई में 25 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति की घोषणा कर दी है। समिति में विधायकों के साथ ही पूर्व विधायकों का दबदबा कायम है। सत्ता के गलियारे से ताल्लुक रखने वाले दिग्गजों के बीच संगठन से गिने-चुने पदाधिकारियों को ही शामिल किया गया है। अंतर्विरोध और गुटबाजी के बीच बिलासपुर संसदीय सीट पर कब्जा बरकरार रखने की एक बड़ी चुनौती संचालक के रूप में स्वास्थ्य मंत्री के सामने भी है।

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में दूसरी मर्तबे राज्य की सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा के नजरिए से देखें तो जिले की राजनीति में वर्चस्व को लेकर पूर्व विधानसभाध्यक्ष धरमलाल कौशिक व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के बीच संघर्ष का लंबा दौर भी चला। दो दिग्गजों की आपसी खींचतान का असर समर्थकों में भी देखने को मिला था। तब समर्थकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत का लंबा दौर भी चला था। प्रशासनिक पकड़ के साथ ही संगठन पर कब्जा को लेकर भी गुटबाजी साफतौर पर उभरी थी। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद जिले की राजनीति का नक्शा बदल गया है। श्री कौशिक व मस्तूरी के विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी दोनों चुनाव हार गए हैं। गौर करने वाली बात ये है कि राजनीतिक रूप से ये दोनों दिग्गज श्री अग्रवाल के विरोधी माने जाते हैं। विरोधियों की कतार में कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के कट्टर समर्थक व पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल की भी गिनती होती है। श्री खंडेलवाल का टिकट काटकर ही श्री अग्रवाल को बिलासपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया था। तब से लेकर आज तक इन दोनों के बीच पटरी कभी बैठ ही नहीं पाई। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बनने के बाद श्रीमती विभा राव और श्री अग्रवाल के बीच सियासी दूरियां बढ़ीं, जो आज भी कायम है। जिला भाजपा के अध्यक्ष राजा पांडेय व प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सवन्नी की राजनीतिक प्रतिबद्धता जिले में जगजाहिर है। संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज ये दोनों पदाधिकारी पूर्व विधानसभाध्यक्ष श्री कौशिक के बेहद करीबी माने जाते हैं। जब श्री कौशिक विधानसभाध्यक्ष के पद पर काबिज थे तो जिले की राजनीति में इन दोनों पदाधिकारियों की तूती बोलती थी। प्रशासन में भी बराबर का पकड़ रखते थे। बदली परिस्थितियों में भी इनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता अभी भी श्री कौशिक के साथ देखी जा सकती है। बिलासपुर जिले का विभाजन और नया जिला बनने के बाद मुंगेली की राजनीति में खाद्य मंत्री श्री मोहले का एकछत्र राज चल रहा है। राजनीतिक रूप से देखें तो श्री मोहले की प्रतिबद्धता भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले स्व. लखीराम अग्रवाल के साथ रही है। इस लिहाज से श्री अग्रवाल के साथ उनका राजनीतिक संबंध अब भी कायम है। अजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष चोवादास खांडेकर श्री मोहले के करीबी रिश्तेदार हैं। बेलतरा के विधायक बद्रीधर दीवान की अपनी अलग पहचान है। तखतपुर के विधायक राजू सिंह क्षत्रिय व लोरमी के विधायक तोखन साहू सीधे सीएम डॉ. रमन सिंह से जुड़े हैं। जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती अंजना मुलकलवार की अपनी अलग पहचान और राजनीतिक रिश्ते हैं। कोटा विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दौड़ में पिछड़ने के बाद जिले के दिग्गज नेताओं से श्रीमती मुलकलवार की पटरी कभी बैठी ही नहीं। संचालन समिति में शामिल नामों पर गौर करें तो नामचीन चेहरे में लोरमी के पूर्व विधायक मुनीराम साहू को छोड़कर श्री अग्रवाल के करीबियों में किसी और बड़े चेहरे की गिनती नहीं होती। सुरेंद्र गुंबर, रामदेव कुमावत और अशोक विधानी, ये ऐसे नाम हैं, जो बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित हैं। श्री विधानी और श्री कुमावत वार्ड की राजनीति तक ही अपनी पहचान बना पाए हैं। विरोधियों को एकसूत्र में बांधे रखना और अपने हिसाब से चुनावी व्यूह रचना बनाकर उसे अमलीजामा पहनाना श्री अग्रवाल के लिए बेहद कठिन काम माना जा रहा है।

अमर के सामने अग्नि परीक्षा

बिलासपुर विधानसभा चुनाव में लगातार जीत हासिल करने का रिकॉर्ड बनाने वाले श्री अग्रवाल के सामने बिलासपुर लोकसभा चुनाव का संचालन करना और उस पर सफल होना अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। विधानसभा चुनाव के नजरिए से देखें तो यह बात साफ है कि बिलासपुर विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी सफल व्यूह रचना और विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं को गोपनीय रूप से अपने लिए काम कराने में महारत हासिल है। लखन लाल साहू के रूप में भाजपा ने इस संसदीय सीट से नया चेहरा को चुनाव मैदान में उतारा है। पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ ही मतदाताओं के बीच सर्वमान्य चेहरा बनाना भी चुनौती से कम नहीं है।

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