रायपुर(ब्यूरो)। प्रदेश में चिटफंड कंपनियों के माध्यम से धोखाधड़ी किए जाने का मामला बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा। कांग्रेस सदस्यों ने इस मामले में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा को घेरने की कोशिश की और उनके जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिगर्मन किया। गृहमंत्री ने सदन को बताया कि 25 चिटफंड कंपनियों व संस्थाओं के खिलाफ शिकायत प्राप्त होने पर अपराध पंजीबद्ध हुए हैं, जिसमें ग्राहकों से धोखाधड़ी कर इनके द्वारा 44 करोड़ 84 लाख रुपए की राशि गबन की गई है। विवेचना के दौरान नौ करोड़ रुपए की राशि एचबीएन कंपनी से पीड़ितों को वापस कराई गई है।

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक मोतीलाल देवांगन ने प्रदेश में चिटफंड कंपनियों के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों के बारे में पूछा। गृहमंत्री ने बताया कि वित्त विभाग की अधिसूचना द्वारा 2013 में चिटफंड अधिनियम के अंतर्गत रजिस्ट्रार, अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार की नियुक्ति की गई है। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव वित्त द्वारा चिटफंड अधिनियम के क्रियान्वयन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। इन कंपनियों की जिला स्तर पर पुलिस, राजस्व, वित्त विभाग व अल्प बचत शाखा के अधिकारियों की टीम गठित कर समुचित जांच के निर्देश दिए गए हैं। विभिन्न जिलों में टीम का गठन किया गया है। समिति द्वारा अब तक 75 कंपनियों के खिलाफ जांच की कार्रवाई की गई है। एचबीएन कंपनी से नौ करोड़ रुपए पीड़ित निवेशकों को वापस दिलाया गया है।

सदस्य मोतीलाल देवांगन ने कहा कि चिटफंड कंपनियां गरीबों का पैसा लूटकर भाग जा रही हैं। धमतरी व जांजगीर चांपा जिले में सबसे अधिक चिटफंड कंपनियां कार्यरत हैं। गृहमंत्री ने कहा कि शिकायतों पर जांच की प्रक्रिया चल रही है। चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिनियम पारित किया गया है, जिसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा गया है। इन कंपनियों पर निगरानी के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी का कार्यालय बिलासपुर और सेबी का कार्यालय रायपुर में खोला गया है। विधायक अमित जोगी ने कहा कि प्रदेश की एक भी चिटफंड कंपनी पंजीकृत नहीं है। विधायक भूपेश बघेल ने कहा कि जब चिटफंड कंपनियां पंजीकृत नहीं हैं तो काम कैसे कर रही हैं? गृहमंत्री ने दोहराया कि 75 शिकायतों पर जांच चल रही है और जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के इस जवाब से कांग्रेस सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और सदन से बहिगर्मन कर गए।