भिलाई। केंद्र सरकार भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) में अपनी 10 फीसद हिस्सेदारी बेचने जा रही है। बुधवार शाम विनिवेश मंत्रालय के सचिव ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। इस घोषणा के बाद गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही सेल के शेयर का भाव आठ फीसद गिर गया। दोपहर साढ़े 12 बजे तक 8.57 फीसद की गिरावट दर्ज की गई। 6.40 रुपये भाव टूटकर 68.30 रुपये पर टिका रहा। निवेशकों के होश उड़ चुके थे। बेचैनी का आलम यह रहा कि सुबह साढ़े नौ बजे से लेकर दोपहर साढ़े 12 बजे तक भाव टूटता रहा।

13 जनवरी की सुबह 9.30 बजे बाजार खुलने के बाद सेल का शेयर भाव 76.95 रुपये पर था। इसके बाद उतार का सिलसिला शुरू हुआ, शाम को 74.10 रुपये पर बाजार बंद हो गया था। शाम सात बजे के बाद विनिवेश मंत्रालय के सेक्रेटरी के ट्वीट ने बाजार में उथल-पुथल मचा दी। सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो चुकी थी। निवेशकों ने भी अपना नजरिया बदलना शुरू कर दिया था। गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही इसका असर देखने को मिलने लगा। 74.10 रुपये से अचानक भाव गिरकर 67.70 रुपये पर आ गया। साढ़े 10 बजे एक रुपये भाव मजबूत होकर 68.75 रुपये पर पहुंचा। इसके बाद उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा।

इधर, हिस्सेदारी बेचने के खिलाफ भिलाई इस्पात संयंत्र से विरोध की आवाज उठने लगी हैं। स्टील एग्जिक्यूटिव फेडरेशन आफ इंडिया (सेफी), बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन, कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया है। सेफी का कहना है कि इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी।

10 फीसद हिस्सेदारी बिकने से ये नुकसान

भारतीय इस्पात प्राधिकरण-सेल की वर्तमान में 75 फीसद हिस्सेदारी है, जो घटकर 65 फीसद रह जाएगी।

हिस्सेदार बेचने के बाद सरकार को मिलने वाले टैक्स से वंचित होना पड़ेगा। इसी टैक्स से सरकार जनहित का कार्य करती है। हिस्सेदार बिकने के बाद सेल की साख पर भी असर पड़ेगा। निवेशकों की संख्या में भी कमी आएगी।

सेल ने अपने पैसे से विकास किया है। 1992 से कोई सरकार से कोई बजटीय सहयोग नहीं मिला है। अपने संसाधनों से सेल खड़ा हुआ है।

सीटू के राष्ट्रीय महासचिव पीके दास ने बताया कि रेवेन्यू कलेक्शन पर प्रभाव पड़ेगा। देश के उन्न्यन और विकास पर इसका असर पड़ना तय है। सेल की हिस्सेदारी और फिर सेल इकाइयों की बिक्री से क्रय शक्ति कम होगी। कर्मचारी और अधिकारी का वेतन अधिक है। यही पैसा मार्केट में जाता है। बाजार में मांग बढ़ती है। सेल अपना अस्पताल, स्कूल, सामाजिग गतिविधियों में सक्रिय रहता है। प्राइवेट सेक्टर अस्पताल, स्कूल आदि से बचता है। आम जनता को नुकसान होगा।

स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन आफ इंडिया-सेफी के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर ने कहा कि सरकार का फैसला गलत है। सरकारी कंपनियों को इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता है। सेफी जल्द ही इस्पात मंत्री से मुलाकात करेगा। शेयर बेचना ही है, तो कर्मचारियों और अधिकारियों को शेयर दिया जाए। इससे कंपनी को बचाया जा सकता है।

इंटक के अध्यक्ष डाक्टर जी. संजीवा रेड्डी ने कहा कि हिस्सेदार बेचने के फैसले के खिलाफ हम सभी श्रमिक संगठन एक हैं। मोदी सरकार के फैसले का समर्थन नहीं कर सकते और न ही खामोश बैठ सकते हैं। 20 जनवरी को नेशनल ज्वाइंट कमेटी फार स्टील-एनजेसीएस की बैठक है। सभी ट्रेड यूनियन के राष्ट्रीय नेता आगे की रणनीति तय करेंगे।

सीटू के राष्ट्रीय महासचिव पीके दास ने कहा कि सरकारी कंपनियों को बेचने का हम लोग पहले से ही विरोध कर रहे हैं। अब सरकार सेल में अपनी हिस्सेदारी बेचने की बात को बोलकर विरोध को और बढ़ा दिया है। सरकार ने पहले जिन इकाइयों और उसकी हिस्सेदारी बेची है, उसका फायदा सरकार को नहीं हुआ है। कोई लांग टर्म प्लानिंग नहीं है। अंबानी-अडानी की जुबान पर सरकार चल रही है।

1993 में कार्मिकों को दे चुके हैं कंपनी का शेयर

बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन-ओए के महासचिव शाहिद अहमद का कहना है कि सरकार सेल में अपनी हिस्सेदारी को ओपन मार्केट में बेचने के बजाय कर्मचारियों और अधिकारियों को ही दे। डिपार्टमेंट आफ पब्लिक इंटरप्राइजेस की गाइडलाइन में भी है कि कार्मिकों को शेयर कंपनियां दे सकती हैं। सन 1993 में सेल का शेयर कार्मिकों को दिया जा चुका है। अर्नलीव इनकैशमेंट के बदले कंपनी का शेयर दिया गया था। इसी तर्ज पर वर्तमान में सरकार कार्मिकों को शेयर देकर पैसा जुटा सकती है। 70 हजार कर्मचारी-अधिकारी इसका लाभ भी ले सकेंगे।

सेल की तीन इकाइयों और नगरनार पर भी छाया है संकट

सेल की इकाई सेलम-तमिलनाडु, अलाय-पश्चिम बंगाल, विश्वेश्वरैया-कर्नाटक की इकाइयों को सरकार पहले ही बेचने का आदेश जारी कर चुकी है। इसी तरह एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट को चालू करने से पहले ही बेचने पर सहमति बन चुकी है। सरकार ने सेल की तीनों छोटी इकाइयों को बेचने के लिए कई बार विज्ञापन तक जारी कर चुकी है। खरीदार अब तक सामने नहीं आ रहे हैं।

Posted By: Shashank.bajpai

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस