Sarvapitru Amavasya 2020: रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पितृ पक्ष का समापन अमावस्या तिथि पर 17 सितंबर को होगा। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों का तर्पण किया जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं पंडितों का कहना है कि नदी-तालाब में स्नान के बाद कुश धारण कर अंजुली में जल लें और दोनों हाथ ऊपर उठाकर अर्पण करें, इससे पूर्वज प्रसन्न होंगे और खुशहाली का आशीर्वाद देंगे। कोरोना महामारी के चलते यदि नदी-तालाब में जाना संभव न हो तो घर में ही तर्पण किया जा सकता है।

कुश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास

ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध की सबसे अहम और आखिरी तिथि होती है, जो इस बार गुरुवार को पड़ रही है। जिन पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती उनका तर्पण सर्व पितृ अमावस्या के दिन किया जाना चाहिए। मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों के निमित्त उपाय करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। मनु स्मृति के अनुसार तर्पण एक यज्ञ करने के बराबर है।

शुद्ध जल, गाय के दूध, चंदन, श्वेत पुष्प, जौ, तिल, चावल और कुश द्वारा किया गया तर्पण श्रेष्ठ माना जाता है। तर्पण में कुश का विशेष महत्व होता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, शिव तीनों का वास माना जाता है। नदी, तलाब में तर्पण को श्रेष्ठ कहा गया है, लेकिन जो नदी-तालाब नहीं जा सकते वह घर में तर्पण कर सकते हैं। एक बाल्टी में लगभग चार-पांच लोटा साफ जल में थोड़ा सा जौ, तिल, चावल, सफेद फूल, सफेद चंदन, गंगाजल आदि मिलाकर तर्पण का जल बनाना चाहिए।

निम्न मंत्र जपें

पूर्व की ओर मुंह करके बाएं हाथ से तांबे के लोटे में बाल्टी का जल लेकर कुश को पकड़ें, दाहिने हाथ की अंगुलियों के अग्र भाग से जल गिराते हुए 'ओम ब्रह्मा तृप्यताम, ओम विष्णुः तृप्यताम, ओम रुद्रः तृप्यताम कहते हुए देवताओं का तर्पण करना चाहिए। फिर उत्तर दिशा की ओर मुंह करके सप्त ऋषियों के लिए हाथ के मध्य से कनिष्ठा अंगुली (छोटी अंगुली) के मूल की तरफ जल गिराते हुए तर्पण करना चाहिए।

इसके बाद दक्षिण की ओर मुंह करके अंगूठा और तर्जनी के मध्य से जल गिराते हुए पितरों का तर्पण करें। पूर्वज का नाम, गोत्र का नाम उच्चारण करते हुए एक के नाम से तीन बार तर्पण करना चाहिए। पिता हो तो अस्मत पिता कहकर नाम लें और तस्मै स्वधा नमः कहते हुए तर्पण करें। माता हो तो तस्यै स्वधा नमः कहकर तर्पण करना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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