रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर बनी राजनीतिक कमेटी के अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने भाजपा की उस मुहिम पर प्रहार किया है, जिसमें महिला मोर्चा प्रदेश में शराबबंदी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। शर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि शराबबंदी जनता का नहीं, सिर्फ भाजपा का मुद्दा है। भाजपा को शराबबंदी करनी है, तो पहले भाजपा शासित राज्यों में करे। भाजपा सिर्फ राजनीति के लिए शराबबंदी के मुद्दे को उठा रही है। उन्होंने कहा कि शराब एक सामाजिक समस्या है। सभी राजनीतिक दल के लोग बैठकर चर्चा करेंगे। एकमत से जो फैसला होगा, उसे मान्य किया जाएगा।

शर्मा ने कहा कि सामाजिक समिति और प्रशासनिक समिति लोगों से संवाद कर रही है। भाजपा में ताकत है तो जहां उनकी सरकार है, वहां शराब बंद करा दे। एक बात को पकड़कर बैठ गए हैं। शर्मा ने कहा कि महंगाई पर बोलने में भाजपा नेताओं को दिक्कत है। मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए शराबबंदी का मुद्दा उठाया जा रहा है। शर्मा ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि जो शराब पीने के आदी हैं, वह शराब कैसे बंद करे। इसके लिए नशा मुक्ति केंद्र खोले गए हैं। सरकार लोगों से इस बुराई से दूर रहने का निवेदन भी कर रही है। जब लोग खुद समझदारी से काम करेंगे तो इस समस्या का समाधान निकल जाएगा।

शराबबंदी जब मुद्दा नहीं, तो क्यों घोषणा-पत्र में किए शामिल: भाजपा

भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने शराबबंदी को जनता का मुद्दा नहीं मानने को प्रदेश की महिलाओं का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के लिए बनी राजनीतिक कमेटी के मुखिया ने मुनादी पीट दी है कि कांग्रेस सरकार अपने एक और बड़े वादे से मुकर चुकी है। सवाल यह है कि क्या सत्ता में आने के बाद कांग्रेस को यह ज्ञान प्राप्त हुआ है कि शराब आवश्यक वस्तु है।

सत्यनारायण के श्रीमुख से सरकार का सत्य सामने आ गया कि जैसे बेरोजगारी भत्ता के वादे पर युवाओं से विश्वासघात किया गया, वैसे ही शराबबंदी के वादे पर महिलाओं के साथ विश्वासघात किया गया है। जब यह कोई मुद्दा नहीं है तो कांग्रेस ने इसे जन घोषणा-पत्र में शामिल क्यों किया?

Posted By: Pramod Sahu

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