रायपुर। Schools In Naxalite Affected Areas: दंतेवाड़ा जिले के अंदरूनी क्षेत्र में स्थित नहाड़ी गांव के इकलौते स्कूल भवन को 13 वर्ष पहले नक्सलियों ने ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद वहां न स्कूल खुला और न ही शिक्षक लौटकर आए। ऐसे में गांव के बच्चों को रोज 10 किलोमीटर पैदल सफर कर अरनपुर व पालनार गांव जाना पड़ रहा था। बच्चों की समस्या को देखते हुए गांव के लोगों ने मिलकर अब पुराने स्कूल भवन के स्थान पर बांस-बल्ली से स्कूल तैयार कर दिया है।

बस्तर संभाग के तीन जिलों सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों में नक्सलियों ने तीन सौ से अधिक स्कूल भवनों को ध्वस्त कर दिया था। वहां अब आदिवासियों के परंपरागत झोपड़े स्कूलों की शक्ल ले रहे हैं। सरकार की शिक्षादूत योजना इन स्कूलों के जरिये गांवों में शिक्षा की रौशनी बिखेर रही है। शिक्षा विभाग के अफसरों के अनुसार तीनों जिलों में अब तक करीब पौने दो सौ स्कूलों को शुरू कर दिया गया है। हालांकि कोरोना की वजह से अभी नियमित कक्षाएं नहीं चल रहीं हैं। कोंटा विधायक और केबिनेट मंत्री कवासी लखमा कहते हैं कि सरकार बस्तर में बंद पड़े हर स्कूल को खोलेगी।

किस जिले में कितने स्कूल खुले

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से बस्तर में बंद पड़े स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू हुई। कई जिलों में 15 वर्ष बाद स्कूल खुल पाए हैं। बीते दो वर्षों में सुकमा में 92, बीजापुर में 42 और दंतेवाड़ा में लगभग 50 से अधिक बंद पड़े स्कूल खोले गए हैं।

सलवा जुडूम के दौर में बंद हुए 300 स्कूल

दक्षिण बस्तर में 2005 से 2011 के बीच चले नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुड़ूम के दौरान तीन जिलों दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के सात सौ से ज्यादा गांव खाली हो गए थे। इन्हीं तीन जिलों में तीन सौ स्कूलों को बंद कर दिया गया। अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों को बंद कर मुख्य सड़क के किनारे बनाए गए सलवा जुडूम कैंपों में स्थानांतरित कर दिया गया।

यह है शिक्षादूत योजना

सरकार और ग्रामीण गांव के पास स्कूल भवन तो तैयार कर रहे हैं, लेकिन अंदरूनी क्षेत्र में शिक्षक की व्यवस्था करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में सरकार ने गांव के ही पढ़े- लिखे युवाओं को बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन्हें शिक्षादूत का नाम दिया गया है। सरकार की तरफ से शिक्षादूत को छह हजार स्र्पये मानदेय दिया जाता है।

इसलिए किया स्कूल भवनों को ध्वस्त

बस्तर संभाग के अंदरूनी क्षेत्रों में स्थित लगभग सभी स्कूल भवनों को नक्सलियों ने केवल इसलिए ध्वस्त कर दिया, ताकि सुरक्षा बलों के जवान वहां स्र्क न सकें।

बस्तर संभाग में बंद पड़े स्कूलों को फिर से शुरू करने के लिए हमारी सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। यह आदिवासी बच्चों के भविष्य का सवाल है।

- डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, स्कूल शिक्षा मंत्री

Posted By: Himanshu Sharma

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