रायपुर। Sehatnama: आम्‍बेडकर अस्पताल में जेल प्रहरी और डाक्टरों के बीच विवाद और झड़प के मामले ने तूल पकड़ लिया। अस्पताल में सुरक्षा के साथ ही मरीजों को भी उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सकीय सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जिस तरह से जवान द्वारा इलाज में देरी के नाम पर आपा खोकर मारपीट की गई। इसकी निंदा चिकित्सा जगत के तमाम विशेषज्ञों के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री तक ने की। लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि समय के साथ अस्पताल में जरूरत के हिसाब से आज भी न तो मैनपावर है और ना ही इंफ्रास्ट्रक्चर।

1100 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल में 500 बिस्तरों की व्यवस्था के अनुसार मेडिकल स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था पर शासन को विचार करना चाहिए, ताकि व्यवस्था दुरूस्‍त होने से मरीजों को भी लाभ मिले और चिकित्सा कर्मियों पर जरूरत से ज्यादा भार न पड़े।

जबरन बयान बदलवाना न पड़े भारी

शिकायत पर जांच समिति इसलिए बैठाई जाती है कि सही और गलत का निष्पक्ष जांच कर सके। लेकिन मेडिकल कालेज में तो उलटी गंगा बहती दिखाई दे रही है। जहां शिकायत के बाद जांच समिति द्वारा जांच की बजाय कर्मियों पर ही बयान बदलने का दबाव बनाने की बात सामने आ रही है। कर्मियों ने चिकित्सा अधिकारी पर अभद्रता का अरोप लगाते हुए इसकी शिकायत की है। मामले में प्रशासन ने जांच समिति बिठा दी। अब जांच के नाम पर बंद कमरे में बयान बदलवाने के चर्चे हैं। ऐसे ही जांच प्रक्रिया के बीच महिला कर्मी दबाव पूर्वक बयान बदलने की बात से बिफर गईं। मैडम ने जैसे ही पुलिस में शिकायत की चेतावनी दी। समिति ने उस दिन जांच ही स्थगित कर दी। सही-गलत के फैसले के बीच एक-एक व्यक्ति को बुलाकर ऐसी गतिविधियों की जांच निष्पक्षता पर ही सवाल उठ रहे हैं।

दो अधिकारियों के बीच खींचतान

मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों के बीच खींचतान कुछ इस तरह बढ़ी कि तीसरे अधिकारी को इसका फायदा मिलना शुरू हो गया। कहा जा रहा है कि मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के अंडर सेक्रेटरी और अधिनस्थ अधिकारी के कामकाज के बीच खींचतान लगातार सामने आ रहा था। ऐसी स्थिति में नुकसान उस अधिकारी का हो गया, जिसके पास विभाग के दिए गए कई महत्वपूर्ण अधिकार थे। उनसे अधिकार तो छीन लिए गए। और तो और कर्मचारी भी उन्हें भाव नहीं दे रहे हैं। वहीं, दूसरे अधिकारी बड़े बाबू साहब के क्या कहने। लाबिंग से उन्हें पछाड़ने की जुगत में लगे रहते हैं। अपने अधिकार खोने से परेशान पहले वाले साहब विभागीय दायित्वों को फिर से पाने के लिए आला अफसरों से जुगाड़ में हैं। लड़ाई में घिरते उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि किस तरह से खुद को स्थापित किया जा सके।

Posted By: Azmat Ali

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