रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नईदुनिया अभियान : मानकों के पालन का उल्लंघन करते हुए 25 माइक्रोन वाली पॉलीथिन के विरोध में व्यापारिक संगठन भी साथ खड़े हैं। बताया जा रहा है कि ये पतली पॉलीथिन 30 फीसद स्थानीय बन रही है व 70 फीसद बाहरी क्षेत्रों से आ रही हैं। प्लास्टिक निर्माता व्यापारी संघ के साथ ही कैट व चैंबर का भी कहना है कि मानकों का पालन नहीं करते हुए आ रही इस पतली पॉलीथिन की बिक्री नहीं होनी चाहिए और इस पर कार्रवाई जरूरी है। ये पतली पालीथिन ही पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है।

बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हर महीने अकेले राजधानी रायपुर में ही करीब 250 टन पॉलीथिन (25 माइक्रान से कम मोटाई) की खपत होती है। सब्जी बाजार, फल बाजार के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी ये पालीथीन धड़ल्ले से देखे जाते है, लेकिन प्रशासन द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

फैक्ट फाइल

1. प्रदेश में पॉलिथीन बनाने वाले करीब 25 से 30 कारखाने हैं।

2.अभी की स्थिति में 25 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पालीथिन 70 फीसद बाहर से आ रही है और केवल 30 फीसद स्थानीय बनाई जा रही है।

नियमों का पालन करना जरूरी

मानकों का पालन नहीं करने वाले पॉलीथिन न तो बाहर से आने चाहिए और न ही स्थानीय स्तर पर बनने चाहिए। सभी को यह समझना होगा कि ये पॉलीथिन कितनी ज्यादा नुकसानदायक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है। व्यापारियों के साथ ही आम उपभोक्ताओं को भी यह समझना होगा।

- अमर पारवानी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चैंबर आफ कामर्स

नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई जरूरी

इस प्रकार के नियम विरुद्ध पॉलीथिन की बिक्री करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है। उनके एसोसिएशन ने पिछले दिनों अपनी बैठक में व्यापारियों को समझा भी दिया है कि इस प्रकार नियम विरुद्ध पॉलीथिन का उपयोग न करें। हमें यह समझना होगा कि यह पॉलीथिन हमारे लिए नुकसानदायक है।

- संतोष जैन, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्लास्टिक निर्माता संघ

बंद होना चाहिए इस प्रकार की पॉलीथिन का निर्माण

इस प्रकार के कम मोटाई वाले पॉलिथीन का निर्माण ही बंद होना चाहिए। साथ ही बाहरी क्षेत्रों से आने पर इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए।

- मनीष राठौड़, कारोबारी

होनी चाहिए कार्रवाई

नियमों का उल्लंघन करते हुए इस प्रकार से पॉलीथिन बनाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही बाहर से आने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

- लालचंद गुलवानी, अध्यक्ष, बंजारी रोड व्यापारी संघ

आयात और निर्माण से मुसीबत

प्रतिबंध के बावजूद भी पॉलीथिन का आयात, निर्माण और उपयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए कष्टदायक परिस्थितियां निर्मित कर रहा है।

-नितिन सिघवी, पर्यावरणप्रेमी, रायपुर

एक्सपर्ट व्यू- पॉलीथिन का असर जनजीवन पर

पॉलीथिन यदि तालाब या नदी में गिरती है तो यह जलीय जीवों को प्रभावित करती है। पॉलीथिन को जलाने से इसमें 16 तरह के जहरीले ऑर्गेनिक कंपाउंड निकलते हैं। ये सीधे मानव के आनुवांशिक विकार और कैंसर जैसी बीमारियों को पैदा करते हैं। पॉलीथिन का निष्पादन सही तरीके से करना चाहिए। दूसरे देशों में पॉलीथिन का लोग इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वे पॉलीथिन के वेस्ट मटेरियल का सही निष्पादन करते हैं या तो पॉलीथिन मुक्त शहर को बनाया जाए या फिर पॉलीथिन के सही निष्पादन के लिए कार्य योजना बनानी चाहिए। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।

- डॉ. शम्स परवेज, पर्यावरणविद, रायपुर

Posted By: Shashank.bajpai

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