रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि 'उन बच्चों के पैरों में फटी बिवाई, नंगे पैर और फटे कपड़े देखे नहीं जाते हैं। कइयों ने तो स्कूल का मुंह तक ही नहीं देखा। भारत के संविधान में शिक्षा सबका मौलिक अधिकार है, पर इस अधिकार से ये बच्चे वंचित न हों, इसका डर है। इन बच्चों का जीवन अंधकार से उजाले की ओर जाए, उनकी प्रगति हो, यही हमारा मकसद है।' यह कहना है मुस्कान टीम के सात शिक्षकों के समूह का, जो छत्तीसगढ़ के वनांचल में मानवता और शिक्षा के अधिकार का पाठ पढ़ा रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं राजधानी से करीब से साढ़े तीन किलोमीटर दूर जशपुर के बगीचा विकासखंड की। यहां सन्नापाट क्षेत्र में राष्ट्रपति के दत्तकपुत्र कहलाने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोग निवासरत हैं। इनमें गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के बच्चों के हित के लिए शिक्षक अजब पहल कर रहे हैं। अवकाश के दिन वहां कार्यरत शिक्षक वनांचल में कुछ दूर गाड़ी से, फिर जहां मार्ग ही नहीं है, जो दुर्गम इलाका है, पहाड़ी-जंगली है, वहां सिर पर बोरा, गठरी रखकर पैदल चलते हैं और इन बच्चों के लिए विभिन्न उपयोगी सामग्री लेकर पहुंचते हैं। इस टीम को मुस्कान नाम दिया गया है। इस टीम में बगीचा के ही शिक्षक एक साथ मिलकर मुस्कान अभियान चला रहे हैं। इनमें बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पत्थलगांव के शिक्षक अनिल श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कन्या स्कूल पत्थलगांव के शिक्षक लीलांबर यादव, सरकारी प्राइमरी स्कूल बटाईकेला के मोहम्मद अफरोज खान, सरकारी प्राइमरी स्कूल भाथुडांड के नित्यानंद यादव, सरकारी प्राइमरी स्कूल अंबाडांड बगीचा के महानंद सिंह, प्राइमरी स्कूल लोरो के रामकुमार तिवारी और शासकीय हाईसकूल महादेवडांड के जनक यादव शामिल हैं।

पढ़ाने और प्रेरित करने के लिए चलते हैं पैदल

टीम के शिक्षक नित्यानंद यादव ने बताया कि बच्चों को प्राइमरी शिक्षा देने के लिए शिक्षकों का समूह उनके गांव तक पहुंचता है। कुछ जगहों तक गाड़ी पहुंच जाती है पर कुछ जगह ऐसा भी है जहां पैदल ही जाना पड़ता है। बगीचा ब्लॉक के हर्राडीपा पंचायत के खजरीकोना और कोदोपारा पंचायत के खांधीटोली गांव, कुनकुरी ब्लॉक के गड़ाकाटा पंचायत के लोटापानी गांव में शिक्षक कैंप लगाते हैं। गरीब बच्चों को गर्म कपड़े, जूते-चप्पल, बैग वितरित, कॉपियां, पेंसिल रबड़, कटर आदि देकर उन्हें स्कूल जाने को प्रेरित करते हैं। बच्चों को पढ़ाकर उन्हें इसकी ओर आकर्षित करने का काम किया जा रहा है।

गांव-गांव तक जाते हैं शिक्षक

शिक्षकों का यह समूह बगीचा ब्लॉक के लेदरापाठ, खजरीकोना, खान्धीटोली, अमटपानी, हर्राढोढ़ा, लालदरा कतईपानी, मनोरा ब्लॉक के हर्रापाठ, पत्थलगांव ब्लॉक के कारियामाटी बालाझार, कुनकुरी ब्लॉक के लोटापानी तथा कांसाबेल ब्लॉक के छेरगोदरी बस्ती जहां पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर जनजाति बीहड़ जंगलों के बीच निवासरत बच्चों तक जाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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