रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हर साल हिंदू संवत्सर के ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती और वट सावित्री की पूजा की जाती है। इस साल अमावस्या दो दिन होने से सोमवती अमावस्या का भी संयोग बन रहा है।

इस संयोग में न्याय के देवता शनिदेव, मृत्यु के देवता यमराज और तीन देवों में से एक संपूर्ण जगत का कल्याण करने वाले भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना एक साथ की जाएगी।

एक महादेव और दो देवों की पूजा

ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार 30 सालों बाद शनि जयंती और सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या को शनिदेव का जन्मोत्सव मनाया जाता है। साथ ही इसी दिन वट सावित्री व्रत रखकर शनिदेव के भाई यमराज और अपने मृत पति को जीवित करने के लिए यमराज से वरदान मांगने वाली सती सावित्री की पूजा की जाती है। चूंकि अमावस्या के दिन सोमवार भी है और सोमवार को भगवान भोलेनाथ की पूजा का विधान है, इसलिए इस दिन शिव मंदिरों में भोलेनाथ की भी पूजा की जाएगी।

कर्म के अनुरुप फलदेते हैं शनिदेव

ज्योतिषाचार्य डा.होसकेरे के अनुसार न्याय के देवता शनिदेव, हर इंसान को उसके कर्म के अनुरुप फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वालों को जीवन में प्रगति, समृद्धि, धन, सुख-शांति प्रदान करते हैं। इसके विपरीत पाप कर्मों में लिप्त रहने वालों को कष्ट, रोग, मानसिक तनाव जैसी परेशानी देकर सजा भी देते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि जयंती पर शनिदेव की प्रतिमा पर तेल अभिषेक करके तिल, गुड़ का दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। साथ ही शनि स्त्रोत का पाठ, शनि मंत्रों का जाप करने की भी मान्यता है। ज्योतिष के अनुसार जिस राशि पर शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती का प्रभाव होता है, उस जातक को अनेक कष्ट भोगने पड़ते हैं।

कुंभ, मीन, मकर पर साढ़ेसाती

साल 2022 में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 29 मई को दोपहर 2.55 बजे शुरू होकर अगले दिन सोमवार को शाम पांच बजे तक रहेगी। उदया तिथि वाली अमावस्या यानी 30 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस समय शनिदेव अपनी स्वराशि कुंभ में विराजित हैं। शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कुंभ, मीन और मकर राशि पर है और कर्क, वृश्चिक राशि पर ढैय्या का प्रभाव है। ऐसी मान्यता है कि जिस राशि में ढैय्या, साढ़ेसाती है, उन्हें दान, पुण्य और विशेष पूजा करनी चाहिए।

शनि के प्रभाव से बचने की मान्यता

- ओम शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप

- ओम् नीलांजनसमाभामसं रविपुत्रं यमाग्रजं छायामार्त्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्

- शनि चालीसा का पाठ

- शनि प्रतिमा पर सरसों तेल अर्पित करके काला तिल, काली उड़द का दान करें

- गरीबों की सहायता रुपये भेंट कर अथवा भोजन करवाकर करें।

- वस्त्र दान करें

Posted By: Pramod Sahu

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