Shankaracharya Nischalanand In Raipur: रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हमारे देश के ज्यादातर नेता केवल अपने स्वार्थ की राजनीति करते हैं, वे देश की प्रगति, शांति के बारे में जरा भी नहीं सोचते। वोट की राजनीति के चलते जाति, पांति का द्वेष बढ़ता जा रहा है। मतांतरण को रोकने में सभी प्रदेशों की सरकार नाकाम है, हिंदू धर्म को क्षति पहुंचाने की साजिशें चल रहीं है। नेताओं को राजनीति की परिभाषा क्या है, यही नहीं पता। हिंदू राष्ट्र बनने के बारे में कोई नेता नहीं सोचता। सभी को अपने वोट बैंक की चिंता है। यह कहना है गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का।

पैसों के दम पर चुनाव, कहां से आएगी नैतिकता

रावांभाठा स्थित सुदर्शन संस्थानम में पत्रकारों के सवालों के जवाब में शंकराचार्य महाराज ने देश की सभी राजनीतिक पार्टी के नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि किसी नेता को देश की फिक्र नहीं है। हम किसी पार्टी के दम पर नहीं, बल्कि देश की जनता को साथ लेकर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का प्रयास कर रहे हैं।

हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारा देश हिंदू राष्ट्र बनकर रहेगा। राजनीति की असली परिभाषा है कि समाज सुसंस्कृत हो, शिक्षित हो, स्वस्थ हो, सर्वजनहिताय की भावना हो। अच्छे लोग राजनीति में नहीं आते, पैसों के दम पर चुनाव जीता जाता है, फिर नैतिकता कहां से आएगी?

शराबबंदी करने के लिए इच्छा शक्ति हो

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी के मुद्दे पर कहा कि आम आदमी से लेकर उच्च अधिकारी, नेताओं को शराब से तौबा करनी ही चाहिए। शराब ही नाश की जड़ है। इसके लिए सरकार सख्त कदम उठाए। किसान आंदोलन पर कहा कि राजनेता के साथ-साथ किसान भी दिशाहीन हो गए हैं।

किसानों को उनका हक मिलना चाहिए लेकिन धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़ इससे समस्या का समाधान नहीं होगा। धर्म और आध्यात्म का ज्ञान के प्रति रूचि न होने से युवा पीढ़ी दिशाहीन हो रही है। युवाओं को जागना है तो धर्म से जुड़ना होगा। युवा पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहे और भारतीय संस्कृति का पालन करें।

मतांतरण में विदेशी ताकत

मतांतरण मामले में कहा कि इसमें शासन-प्रशासन की दिशाहीनता जिम्मेदार है। इसके लिए 70 कारण राजनीतिक दलों की विफलता और 30 प्रतिशत विदेशी ताकतों का हाथ है। गोवंश की तस्करी पर कहा कि अन्य राज्यों में गोवंश न जाए, इसके लिए सरकार सख्त कदम उठाए। सामाजिक संगठन भी अपना दायित्व निभाए। बढ़ते अपराध के लिए थ्री जी यानि क्लास एंड को- एजुकेशन, कोर्ट और क्लब जिम्मेदार है।

धर्म के ठेकेदारों से दूर रहें संत

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष संत नरेंद्र गिरी की मृत्यु पर कहा कि इस मामले में जांच चल रही है, सभी संतों को चाहिए कि वे धर्म के ठेकेदारों से दूर रहे।

Posted By: Kadir Khan

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