रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पुरानी बस्ती के बनियापारा स्थित गोपीदास मठ में 1979 से भगवान श्रीराम विवाहोत्सव की धूम मचती आ रही है। इसमें मोहल्ले के सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। बरात जिस गली से भी गुजरती थी वहां बरातियों पर फूल बरसाकर, जलपान, मिठाई, आइस्क्रीम से बरातियों का स्वागत किया जाता था। इस साल भी तैयारी जोरशोर से चल रही है, लेकिन कोरोना महामारी के मद्देनजर प्रशासन द्वारा बरात निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। पिछले 42 साल में यह दूसरा मौका है, जब लगातार दूसरे साल कोरोना महामारी के कारण बरात नहीं निकाली जा रही है।

इसके बावजूद मोहल्ले में श्रीराम-सीता विवाहोत्सव को लेकर उत्साह छाने लगा है। श्रीगोपीदास रामजानकी मंदिर सेवा समिति के संयोजक, मठ के महंत राजीवनयन शरण ने बताया कि कोविड के नियमों का पालन करते हुए मंदिर परिसर के भीतर ही विवाह की रस्में निभाई जा रही है। विवाह से पूर्व हरिद्रालेपन संस्कार में शनिवार को दूसरे दिन भी मोहल्ले की महिलाओं ने माता जानकी और भगवान श्रीराम को हल्दी, मेहंदी लगाने की रस्म निभाई। दो घंटे तक महिलाओं ने बधाई गीत गाए और भक्तिभाव से झूम उठी।

वीआइपी रोड श्रीराम मंदिर में सजेगा सेहरा

वीआइपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित हनुमतलाल ने बताया कि श्रीराम विवाहोत्सव पर सुबह दूल्हा सरकार श्रीराम और दुल्हन माता जानकी की प्रतिमा का अभिषेक के पश्चात आरती की जाएगी। शाम को श्रीरामजी का श्रृंगार दूल्हे के रूप में करके राजस्थानी पगड़ी पहनाई जाएगी। माता जानकी का भी दुल्हन के रूप में जेवरात और घाघरा-चुन्नाी से श्रृंगार किया जाएगा।

दूधाधारी मठ में राघवेंद्र सरकार का श्रृंगार

दूधाधारी मठ में भी श्रीराम विवाहोत्सव पर राघवेंद्र सरकार, श्रीराम और माता जानकी समेत लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की प्रतिमा का भी मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा। महाआरती के पश्चात महाभंडारे में प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जा रही है।

Posted By: Shashank.bajpai

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