रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रायपुर केंद्रीय जेल में पिछले दो वर्षों की तरह ही इस बार भी रक्षाबंधन पर्व पर बहनों को जेल में बंद अपने भाइयों से मिलने और राखी बांधने की छूट नहीं मिल पाई। लिहाजा बहनें जेल के अंदर राखी भेजने के लिए सुबह से ही जेल परिसर के बाहर लाइन में खड़ी रहीं। राखी पर इस बार भी कोरोना का ग्रहण लगा रहा। दरअसल बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते इस बार भी बहनें जेल में बंद भाइयों की कलाइयों पर राखियां नहीं बांध पाईं। हालांकि जेल प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखकर बंदियों को वीडियो व आडियो कालिंग से बात कराने की सुविधा दी थी।

राखी भेजने के लिए जेल परिसर में लगी रही बहनों की भीड़

रायपुर केंद्रीय जेल के जेलर उत्तम पटेल ने बताया कि 435 आडियो कालिंग और 55 वीडियो कालिंग से बहनों की उनके कैदी भाइयों से बात कराई गई। इस दौरान बाहर से 552 बहनों ने जेल में राखी जमा करवाई थी। सभी राखियों को सैनिटाइज कर अंदर भिजवाया गया।

कोरोना काल के पहले बंदी भाइयों को बहनें जेल के अंदर जाकर राखी बांधती थीं, लेकिन पिछले दो सालों की तरह ही इस बार भी बहनों को जेल मुख्यालय से जारी दिशा निर्देश के अनुसार जेल में बंद भाइयों के हाथों पर राखी बांधने के बजाय राखी लेकर भिजवाई गई। बहनें जेल के अंदर राखी भेजने के लिए बुधवार और गुरुवार को सुबह से ही जेल परिसर के बाहर लाइन में खड़ी रहीं। यही नहीं, रक्षाबंधन के पर्व पर कैदियों के हाथ खाली न रहें, इसके लिए जेल प्रबंधन ने पहले से ही राखी खरीदकर सभी कैदियों को वितरित कर दिया था।

पुलिस कर्मियों ने बालिका गृह, नारी निकेतन जाकर मनाया रक्षाबंधन

रक्षाबंधन पर्व पर खम्हारडीह और माना पुलिस थाना के कर्मचारियों ने बालिका गृह, नारी निकेतन, बालिका आश्रम माना में रह रही बहनों से राखी बंधवाकर उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया। इस मौके पर बहनों ने भाइयों का मुंह मीठा करवाया।

महापौर ने बहनों से बंधवाया राखी

महापौर एजाज ढेबर ने रक्षाबंधन पर्व पर अपने निवास स्थान पर बहनों से राखी बंधवाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ त्योहार नही हैं, एक विश्वास का रिश्ता है, उम्मीद का बंधन है। रक्षा का संकल्प है और प्रेम की डोर का पर्व है।

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