रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है। छोटे सत्र में छह बैठकें होंगी, जिसमें 4500 करोड़ के अनुपूरक बजट के साथ सात विधेयक पेश होंगे। छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद विधानसभा की बैठक व्यवस्था में भी परिवर्तन की संभावना है।

दूसरी लाइन में बैठने वाले विधायक मोहन मरकाम को पहली लाइन में जगह दी जा सकती है। अब तक मंत्रियों के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, रामपुकार सिंह, खेलसाय सिंह पहली लाइन में बैठ रहे हैं।

वहीं, विपक्ष की तरफ पहली सीट पर भाजपा विधायक दल के नेता धरमलाल कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ विधायक डॉ रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और ननकीराम कंवर बैठते हैं।

वहीं जकांछ विधायक दल के नेता धरमजीत सिंह और रेणु जोगी हैं। विधानसभा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो अमरजीत भगत की सीट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जबकि मोहन मरकाम को रामपुकार सिंह या खेलसाय सिंह में से किसी एक विधायक की सीट पर जगह मिल सकती है।

छोटे सत्र में बड़ी घेराबंदी की योजना

छोटे सत्र में सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव से लेकर अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की है। जकांछ विधायक दल ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए भाजपा से समर्थन मांगा है। जकांछ को समर्थन देने पर शुक्रवार सुबह भाजपा विधायक दल मंथन करेगी। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के कक्ष में शुक्रवार सुबह विधायकों की बैठक होगी, जिसमें सत्र की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

इसके साथ ही भाजपा करीब एक दर्जन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने मीडिया से चर्चा में कहा कि दंतेवाड़ा में हमारे विधायक रहे भीमा मंडावी की हत्या का मामला, जवानों की शहादत का मामला, किसानों की ऋणमाफी का मुद्दा, अटार्नी जनरल (महाधिवक्ता) की नियुक्ति, रेत नीति, शराब बंदी में वादा खिलाफी, खाद-बीज के मुद्दे, पुलिस एवं कानून व्यवस्था को सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि पुलिस हिरासत में अब तक तीन व्यक्तियों की मौत, आर्थिक अराजकता, स्कूली छात्रों से शिक्षकों के छेड़छाड़, तीर्थयात्रा में भ्रष्टाचार, अमानक दवाई एवं दवाई खरीदी में भ्रष्टाचार, स्मार्ट कार्ड योजना, आयुष्मान योजना को उठाया जाएगा।

छह महीने की सरकार में जनता परेशान : डॉ रमन

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मानसून सत्र बहुत ही छोटा है, फिर भी हम कांग्रेस सरकार की छह महीने की काम-काज की पोल-खोल कर रख देंगे। सदन में हम बताएंगे कि छह महीने की सरकार में जनता किस तरह से परेशान है। समाज के अलग-अलग वर्गों में जो गुस्सा है, उसकी झलक विधानसभा में देखने को मिलेगी।