रायपुर। रायपुर में ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जिस दिन सड़क पर इंसान का खून न बहे। सर्वाधिक जानें बाइक सवारों की जाती हैं। मौत की जो वजह बनती है, वह है हेलमेट न पहनना। रविवार को उरला में तीन बाइक सवारों की मौत और कुशालपुर में एक स्कूटी सवार महिला की जान हेलमेट न पहनने के कारण हुई। यह दिल्ली, मुंबई नहीं है, जहां पर लोग स्वयं हेलमेट पहनते हैं, क्योंकि उन्हें कानून का भय होता है।

रायपुर में स्वयं हेलमेट पहनने वालों की संख्या बमुश्किल दो-चार फीसद होगी। बाकी पुलिस डर के कारण हेलमेट पहनते हैं, न कि सुरक्षा के लिए। इसलिए जरूरी है कि बिना रूके, 24 घंटे सातों दिन कार्रवाई होनी चाहिए। तभी जाकर हादसों में मौत के बढ़ते आंकड़ों को कम किया जा सकता है।

'नईदुनिया' टीम सोमवार को शहर के शास्त्री चौक, जयस्तंभ चौक, भगत सिंह चौक पर करीब घंटेभर तक मौजूद रही।इस दौरान सिग्नल पर अगर 10 लोग रूके तो उनमें से एक-दो ही हेलमेट पहने नजर आए थे। अब सोचिए, अगर ऐसी ही लापरवाही जारी रही तो कैसे हादसों पर लगाम कसना मुमकिन है।

हेलमेट गाड़ी के बंधा रहता है, या पीछे वाला पकड़ा रहता है- लोगों के पास हेलमेट होते हैं और वे उस जगह पर पहनते दिखे जहां पर पुलिस की कार्रवाई होती नजर आती है। बाकि जगह पर हेलमेट हैंडल पर तो कभी पीछे बंधा होता है। तो कभी पीछे बैठने वाला व्यक्ति इसे पकड़ा दिखा।

600 पुलिसवालों पर भी हुई कार्रवाई- पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 600 से अधिक पुलिसवालों का चालान कट चुका है। इन्होंने हेलमेट नहीं पहने थे, रॉग साइड ड्राइविंग कर रहे थे। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान अपने साथियों से कहा-सुनी भी हुई है, लेकिन चालान का भुगतान करना ही पड़ा।

- त्यौहारी मौसम है, इसलिए बल व्यवस्था बनाने में लगाया गया है। त्यौहार के बाद कार्रवाई होगी। तीन सवारी, रेड सिग्नल जंपिंग, रॉंग साइड को भी ई-चालान सिस्टम में शामिल किया जाएगा। हेलमेट पर नियमित कार्रवाई होगी। - सतीष ठाकुर, डीएसपी, ट्रैफिक

Posted By: Nai Dunia News Network