रायपुर(ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्य विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों द्वारा दो दिन में चार बार गर्भगृह में प्रवेशकर नारेबाजी करने पर विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने बुधवार को व्यवस्था दी कि जानबूझकर नियम तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। सोमवार और मंगलवार को कांग्रेस के सदस्यों ने दो-दो बार गर्भगृह में प्रवेश कर नारेबाजी की थी और निलंबित हुए थे। अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 250 (क) का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर सभा के गर्भगृह में प्रतिपक्ष के सदस्यों के आचरण पर यह टिप्पणी की थी कि जानबूझकर नियमों का उल्लंघन उचित नहीं है। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी आसंदी का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था।

विधानसभा अध्यक्ष ने बुधवार को सदन में व्यवस्था देते हुए कहा कि सदन की गरिमा और अनुशासन बनाने में सभी सदस्यों का सहयोग अपेक्षित होता है। सभा में विरोध प्रकट करने अथवा किसी विषय पर असहमति के संसदीय तरीके उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ की इस सभा ने अपनी स्थापना की तिथि से ही जो अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं, उनमें विरोध स्वरूप सभा के गर्भगृह में आने पर स्वमेव निलंबन का नियम नियमावली में सम्मिलित करना एक महत्वपूर्ण निर्णय है। सदस्यों से यह अपेक्षा रहती है कि सदन की गरिमा व अनुशासन बनाने में वे अपने स्वयं के द्वारा बनाए गए नियमों का पालन दृढ़ता के साथ करें। यदा-कदा किसी नियम का उल्लंघन तो मान्य किया जा सकता है, लेकिन निरंतर जान-बूझकर सउद्देश्य नियम तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। सभा में विगत दो दिनों से रोज ऐसा हो रहा है, परंपराएं टूट रही हैं। सभा के गर्भगृह में आकर अशोभनीय आचरण किया जा रहा है। इस सदन की गरिमा व प्रतिष्ठा से सभी सदस्य भलीभांति अवगत हैं। यदि हम स्वयं इसकी रक्षा नहीं करेंगे तो सभा के बाहर इस प्रदेश की ढाई करोड़ जनता के बीच क्या संदेश जाएगा? यह विचारणीय प्रश्न है। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से कहा कि वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखने का प्रयास करते हुए सभा में विरोध के मान्य तरीकों का ही प्रयोग करें और इस सदन की प्रतिष्ठा व गरिमा को संरक्षित रखते हुए जनता के बीच इसकी मर्यादा को बनाए रखें।