रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भगवान नृसिंह जयंती धूमधाम से मनाई गई। सुबह दुग्धाभिषेक के बाद शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में राजा हिरण्यकश्यप कोड़े बरसाते हुए जब सड़क पर निकले तो श्रद्धालु इधर-उधर भागने लगे। शोभायात्रा के वापस मंदिर पहुंचने पर भगवान नृसिंह और हिरण्यकश्यप के बीच युद्ध हुआ। एक घंटे तक युद्ध होता रहा। जैसे ही संध्या बेला हुई, भगवान नृसिंह ने हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में बिठाकर संहार किया और भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में बिठाया। इस बीच जयकारे गूंज उठे।

यह दृश्य बूढ़ेश्वर मंदिर के सामने दिखाई दिया। मंदिर की चौखट पर भगवान ने हिरण्यकश्यप का संहार किया। बूढ़ेश्वर मंदिर के अलावा ब्रह्मपुरी स्थित प्राचीन नृसिंह नाथ मंदिर में भी हिरण्यकश्यप वध का मंचन किया गया।

सुबह दुग्धाभिषेक, शाम को शोभायात्रा

इससे पूर्व मंदिर के महंत देवदास महाराज के सानिध्य में सुबह भगवान नृसिंह की प्रतिमा का दुग्धाभिषेक किया गया। हवन के पश्चात मंदिर परिसर में हजारों लोगों ने बैठकर भोजन-प्रसादी ग्रहण किया। शाम को मंदिर से गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा ब्रह्मपुरी मंदिर से निकलकर, बूढ़ापारा, पुरानी बस्ती थाना, कंकाली पारा होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुंची।

ब्रह्मा से मिला था वरदान

राजा हिरण्यकश्यप को ब्रम्हाजी से वरदान मिला था कि उसकी मौत न दिन में होगी न रात में, वह न आदमी के हाथों मरेगा न जानवर के, वह न तो अस्त्र से मरेगा न शस्त्र से, उसकी मौत न घर के भीतर होगी न घर के बाहर होगी। न आसमान में होगी और न जमीन पर। ऐसे में भगवान विष्णु ने नर और सिंह का रूप धारण कर नृसिंह अवतार लिया। भगवान ने उसे अपनी जंघा पर बिठाकर दिन-रात की मिलन बेला में राजा के महल की चौखट पर संहार किया।

दूधाधारी मठ में पूजा

श्री दूधाधारी मठ में भगवान श्री नृसिंह का जन्मोत्सव मनाया गया। श्री दूधाधारी मठ से संबंधित जैतूसाव मठ, शिवरीनारायण मठ तथा भगवान राजीवलोचन मठ राजिम में भगवान नृसिंह की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मठ मंदिर के सभी संत-महात्मा, पुजारी, विद्यार्थीगण, कर्मचारियों तथा आम श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन-पूजन किए। श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर महंत रामसुंदर दास ने इस अवसर पर कहा कि- भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रल्हाद की रक्षा और कष्ट निवारण के लिए नृसिंह का रूप धारण किया। हिरण्यकश्यप के नाश तथा भक्त प्रल्हाद की रक्षा के लिए वे खंभे से प्रकट हो गए। पंडित रामरतन महाराज ने बताया कि जो भी साधक भक्त नृसिंह जन्मोत्सव के दिन भगवान की भक्ति श्रद्धापूर्वक करते हैं, उनके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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