रायपुर। Raipur Local Edit: राजधानी रायपुर में बैडमिंटन अकादमी खोलने का निर्णय एक सराहनीय कदम है। इससे बैडमिंटन खिलाड़ियों को राज्य में ही विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। आने वाले समय में राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में प्रदेश और देश का नाम रोशन करते देखे जा सकेंगे। इस वर्ष टोक्यो में आयोजित ओलंपिक और पैरा ओलंपिक में देश को मिली सफलता से खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बना है।

जहां सिर्फ अधिकतर लोग क्रिकेट, फुटबाल, हाकी, टेनिस आदि की बातें किया करते थे, अब भाला फेंक, गोला फेंक, ऊंची कूद, लंबी कूद, तेज चाल, गोल्फ, शूटिंग, भारोत्तोलन जैसे खेलों में भी रुचि लेने लगे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूई से प्रभावित होने वाले बच्चे और युवा अब बाक्सिंग और कुश्ती पर गर्व करने लगे हैं। खिलाड़ियों ने आर्थिक-सामाजिक बाधाओं को पारकर जिस तरह का खेल दिखाया, वह लाजवाब था। इन बदली परिस्थितियों ने सरकारों को खेल के प्रति अपने नजरिए और नीतियों पर विचार करने को विवश किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों के विकास में धन की कमी नहीं आने पाएगी। छत्तीसगढ़ खिलाड़ियों का गढ़ बने, इसके लिए मुख्यमंत्री ही नहीं, सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। खेल संघों में पदाधिकारियों की नियुक्तियां समय पर हों तथा ये पद पूर्व खिलाड़ियों के लिए आरक्षित हों, जिससे ये राजनीतिक महत्वाकांक्षियों के तुष्टिकरण का माध्यम न बनें। खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए राज्य सेवाओं में नियुक्ति, खेल पुरस्कारों में दी जाने वाली राशि में वृद्धि, खेल छात्रवृत्ति में वृद्धि जैसे प्रविधान किए जाने चाहिए।

पूर्व पदक विजेता खिलाड़ियों की निश्चित आय और सम्मान को सुनिश्चित करना चाहिए। खेल संरचनाओं का रखरखाव, खिलाड़ियों की डाइट, प्रशिक्षकों की नियुक्ति (खर्च) आदि के खर्च की व्यवस्था करना। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व मद का प्रयोग करने का विचार सराहनीय है। अकादमी में खिलाड़ी अभ्यास कर पाएं, इसके लिए खेल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

साथ ही अकादमी या प्रशिक्षण केंद्र प्रभावशाली व्यक्तियों के शौक पूरे करने के स्थल न बनें, इसका भी ख्याल रखना होगा। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रशिक्षण और स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता हो। उनका मूल्यांकन उनके खेल से हो, न कि उनके पारिवारिक प्रभाव या पहचान से। खिलाड़ी अपने हुनर का प्रदर्शन कर सकें, इसके लिए राज्य में विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया जाना चाहिए तथा खेल प्रतियोगिताएं विविधता पर केंद्रित हों।

अन्य प्रयासों में संघर्ष करके खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने वाले खिलाड़ियों की जीवनी को स्कूल और कालेज पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना, वृत्तचित्र निर्माण आदि हो सकते हैं। उपरोक्त सभी प्रयास तभी सफल होंगे, जब खेल को जीवन में और खिलाड़ियों को समाज में पूर्णतः स्वीकार किया जाएगा।

Posted By: Shashank.bajpai

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