मृगेंद्र पांडेय, रायपुर। Story of Life Experience: आपने सुना होगा कि पुलिस अपराधियों पर डंडे बरसती है, दंगा-फसाद करने वालों को बैरिकेड लगाकर रोकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस के एक डीएसपी ने इन बैरिकेड के बंधनों को तोड़ते हुए एक किताब लिख डाली है। घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर के भोपालपट्नम में पदस्थ डीएसपी अभिषेक सिंह ने अपने जीवन के अनुभवों को लेकर 'बैरिकेड" किताब लिखी है। इसमें उन्होंने बीएचयू में पढ़ाई से लेकर दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी, अन्ना आंदोलन और फिर छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुभवों को शब्दों में उकेरा है।

बकौल अभिषेक, किताब में ऐसे युवक की कहानी को बयां किया गया है, जिसे प्यार हो जाता है। उसकी दोस्ती और संगति का जिंदगी पर असर, जीवन के सफर के अनचाहे मोड़, सिविल सर्विसेज के लिए स्ट्रगल को बयां करने की कोशिश की गई है। अभिषेक छत्तीसगढ़ पुलिस ने वर्ष 2013 में डीएसपी के पद पर चयनित हुए। अब तक अभिषेक जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर और बीजापुर में पदस्थ रहे हैं। जब अभिषेक से पूछा गया कि बैरिकेड किताब लिखने के बारे में विचार कहां से आया तो उन्होंने बताया कि जब राजनीति में था, तो बैरिकेड को कूदकर पार करना होता था, विरोध दर्ज कराने के लिए बैरिकेड से आगे जाने की होड़ लगी रहती थी।

अब पुलिस की नौकरी में आने के बाद बैरिकेड के इस पार आ गया। अब मेरा काम बैरिकेड के उस पार से कोई इस पार ना आये, उसे रोकने का हो गया है। कभी बैरिकेड के इस पार था, अब बैरिकेड के उस पार हूं। अब उन बिताए लम्हों को याद करता हूं। किताब का कवर फोटो भी उसी को दर्शा रहा है। अभिषेक बताते हैं कि किताब में प्यार है, तो धोखा भी है। दोस्ती है तो लड़ाई भी है। मिलन है तो जुदाई भी है। पुलिस के बैरिकेड के उस पार की भी कहानी है और इस पार की भी। कुल मिलाकर अंत मे सफलता की जबरदस्त रोशनी भी है। खासकर इस किताब को युवाओं के लिए लिखा गया है।

यूपी के जौनपुर के रहने वाले अभिषेक के पिता थे जज

डीएसपी अभिषेक मूलत: उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता बिहार में जज के पद पर पदस्थ थे। यही कारण है कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान 16 साल बिहार के अलग- अलग जिलों में बिताए। इसके बाद इलाहाबाद, जौनपुर, बनारस में पढ़ाई पूरी की। अभिषेक ने बताया कि जब कैरियर बनाने का समय आया तो वे सिविल सर्विसेज की तैयारी के मक्का- मदीना बोले जाने वाले दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुंचे। वहां उस वक्त अन्ना आंदोलन और आम आदमी पार्टी से बहुत नजदीकी से जुड़े रहे। वक्त ने करवट मारी और छत्तीसगढ़ में डीएसपी के पद पर चयन हो गया। अभी तक तीन साल में तीन जिलों में पोस्टिंग हो चुकी है।

Posted By: Himanshu Sharma

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