दीपक शुक्ला, रायपुर। छह साल पहले पिता की मौत हो गई थी। लड़की थी, इसलिए खुद की सुरक्षा भी चुनौती थी। ऐसे में बचपन का पसंदीदा खेल क्रिकेट का मोह त्याग मार्शल आर्ट सीखने लगी। कोच ने प्रतिभा को पहचाना और बना दिया बॉक्सर। खूब मेहनत की। कई इनाम जीते। लेकिन वर्ल्ड कप थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन नहीं हो पाया। किंतु मेहनत तो किस्मत को चूमने खड़ी थी। चैंपियनशिप के लिए चयनित महाराष्ट्र की खिलाड़ी बीमार पड़ गई और इसे मिल गया मौका। पंद्रह दिन जमकर पसीना बहाया और गोवा में हुए चैंपियनशिप में अपने से अधिक वजन वर्ग की कई खिलाड़ियों को हराकर सोना लपक लिया।

यह कहानी है रायपुर की खिलाड़ी टिकेश्वरी साहू की। एक से तीन फरवरी तक यह चैंपियनशिप गोवा में आयोजित की गई थी, जहां उसने अपने पंच का दम दिखाया। सफलता की नित नई ऊंचाइयों छूने वाली और वर्तमान में दुर्गा कॉलेज की छात्रा टिकेश्वरी शहर के गुजराती स्कूल में ट्रेनिंग भी देती है। उसकी सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेटियां किसी से कम नहीं।

मेहनत देख कर मदद के लिए बढ़े कई हाथ पिता की मौत के बाद टिकेश्वरी क्रिकेट का मोह त्याग आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट सीखने लगी, लेकिन घर की माली हालात ऐसी नहीं थी कि इस खेल में आगे बढ़ने के लिए वह एकेडमी में प्रवेश ले सके। इस समय वह शहर के गुजराती स्कूल की छात्रा थी। वहां की प्राचार्य से उसकी परेशनियों को महसूस किया।

उन्होंने स्कूल के कोच अनीस मेमन को उसके बारे में बताया। मेनन ने टिकेश्वरी को बिना किसी फीस के एकेडमी में प्रवेश दे दिया। कोच की बदौलत ही आज टिकेश्वरी सोने की तरह दमक रही है। राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय के बाद अब वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर दुनिया के सामने छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर दिया है।

निर्णायकों की चुनौती को किया स्वीकार

टिकेश्वरी 44 किलो से कम वजन वर्ग में थी। वहीं दूसरी ओर वर्ल्ड कप में टिकेश्वरी के वजन वर्ग का कोई खिलाड़ी नहीं था। निर्णायकों ने साफ कह दिया था कि बिना खेले पदक नहीं दे सकते। ऐसे में टिकेश्वरी ने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अपने से अधिक वजन वर्ग की खिलाड़ियों को हराकर जीत दर्ज की।

मां के संघर्ष से मिलती है ताकत

छह साल पहले टिकेश्वरी के पिता की मौत हो गई। मां नीरा साहू पर चार बेटियों की जिम्मेदारी आ गई। लेकिन वह टूटीं नहीं। बच्चों की परवरिश के लिए आरा मिल में काम करने लगीं। टिकेश्वरी बहनों में सबसे बड़ी है। घर के हालात को समझती है। यह पूछने पर कि आखिर यह ताकत, आत्मविश्वास कहां से मिलता है, तपाक से कहती है, मां के संघर्षों को देखकर। टिकेश्वरी के मुताबिक सभी लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए कुछ न कुछ सीखना चाहिए।

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