रायुपर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

या रहमते आलम तमन्ना करवटे लेती है। हसरतें याद करती हैं चले भी आओ मोहब्बत तुमको याद करती है..., तू कूजा मन कूजा, तू अमीर-ए-हरम मैं फकीर-ए-अजम ..., 'मैं प्यासा पनघट पर खड़ा हूं, मुझसे जात न पूछ'..., ऐसी ही कई सूफियाना कव्वाली और देश प्रेम से ओतप्रोत शेर से सूफियाना महफिल का आगाज हुआ। इस अवसर पर मेहमान कव्वाल सरफराज चिश्ती और उनकी पूरी टीम ने पूरी महफिल को सूफियाने रंग में रंग दिया। मौका था सूफियाना महफिल का, जो ख्वाजा गरीब नवाज के उस-ए-पाक के मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से शहीद स्मारक भवन में आयोजित किया गया। महफिल में कव्वाल ने सूफी कव्वाली और देश भक्ति नज्म और शेर से श्रोताओं को सराबारे कर दिया। श्रोताओं की तब वाह-वाह और तालियों से पूरा हाल गूंज उठा जब भर दो झोली मेरी या मोहम्मद की धुन बजाई..., तीन घंटे में कव्वालों ने अपनी कलाम से सभी को मदमस्त कर दिया।

वहीं इस अवसर पर सुबह कुरआन ख्वानी, दरूद ख्वानी रखा गया। राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलाम रिजवी ने बताया कि वक्फ बोर्ड और उर्दू अकादमी के तत्वावधान में वक्फ संपत्तियों की बेहतरी उर्दू जबान की तरक्की और समाज सेवा के उद्देश्य से बेहतरीन काम करने वाली तंजीमों के सम्मान किया गया।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक आयोग के प्रेसिडेंट महेंद्र छावड़ा, हज कमेटी के चैयरमेन असलम खान, अल्प संख्यक आयोग के सदस्य हाफिज खान के साथ ताजुद्दीन आसीफ, अनील जैन, फारूकी, एमआर खान और मोहम्मद ताहीर आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network