Sushant Suicide Case: रायपुर। फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहार और महाराष्ट्र पुलिस आमने-सामने है। इस मामले में तब और तूल पकड़ा, जब मामले की जांच करने पटना से मुंबई पहुंचे बिहार कैडर के आईपीएस विनय तिवारी को बीएमसी (वृहनमुंबई म्यूनिसिपल कार्पोरेशन) द्वारा क्वारंटाइन कर दिया गया। क्वारंटाइन होने के बाद भी आईपीएस तिवारी ने अपनी जांच जारी रखी। हालांकि अब यह मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया है। सुशांत केस में अब तक उनके हाथ क्या लगा, इस बारे में उन्होंने क्वारंटाइन रहने के दौरान गुस्र्वार की शाम नईदुनिया के वरिष्ठ समाचार संपादक मयंक चतुर्वेदी से मोबाइल पर बात की। उन्होंने कहा कि इस मामले का सच सामने लाने में सुशांत के स्टाफ के चार सदस्य प्रमुख कड़ी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई निश्चित तौर पर इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश...।

अब तक की जांच में आपके हाथ क्या लगा?

- मामले की जांच बिहार पुलिस 27 जुलाई से कर रही है। दो अगस्त को मैं मुंबई पहुंचा था। अभी कुछ लोगों से ही बातचीत शुरू हो पाई थी कि रात में मुझे क्वारंटाइन कर दिया गया। इसके बाद भी चार अगस्त तक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कुछ लोगों से पूछताछ की गई। हादसे के वक्त सुशांत के घर में मौजूद चार लोगों दीपेश, देवेश, पठानी और एक अन्य से कई बार बात हुई। हर बार उन्होंने अपने बयान बदले। ये चारों इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और अगर इन से ढंग से पूछताछ हो तो सच्चाई सामने आ सकती है।

जांच में ऐसा कोई तथ्य मिला जो नतीजे तक पहुंचाने में मदद करे?

- यह लगभग साफ है कि सुशांत के पास न तो काम की कमी थी और न पैसों की, लेकिन अब तक जिससे भी बात हुई है, उनमें से अधिकतर ने ये जरूर बताया कि उनकी जिंदगी में एक लड़की (नाम नहीं बताया, लेकिन संभव रिया के आने के बाद खुद की कमाई पर सुशांत का नियंत्रण नहीं था। मीडिया ने भी इस बात को अपने-अपने स्तर पर दिखाया और बताया भी है। पैसे का मामला भी कहीं न कहीं सुशांत की मौत से जुड़ा हुआ लगता है।

क्या महाराष्ट्र का कोई नेता भी जांच के दायरे में था?

- इस तरह के मामलों में हर उस बिंदु पर जांच की जाती है, जो केस को सुलझाने में मददगार हो। इसी दृष्टिकोण से हमारी जांच कई एंगल पर चल रही थी। चूंकि हम महाराष्ट्र पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं थे। इसलिए हम हर उस बिंदु को जांचना चाहते थे। इस मामले में किसी नेता की संलिप्तता की बात आ रही थी, हम उसकी भी जांच करने वाले थे। हालांकि उस दिशा में ज्यादा कुछ हो नहीं पाया था।

इस मामले को आप किसी तरह से देखते हैं?

- एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि जैसा इस मामले को बताने का प्रयास किया जा रहा है, वास्तव में वैसा है नहीं। महाराष्ट्र पुलिस जो भी बता रही है, वह गले उतरने वाला नहीं है। बहुत सारी चीजें ऐसी हैं, जो बताती हैं कि महाराष्ट्र पुलिस उस दिशा में जांच ही नहीं कर रही थी, जिस दिशा में होनी चाहिए। हमारी जांच की दिशा ज्यादा स्पष्ट और सही नतीजे देने वाली थी। खैर, अब आगे की जांच सीबीआई कर रही है। इसलिए जो भी प्रमाण मिले हैं, उन्हें सीबीआई को सौंप दिया जाएगा।

महाराष्ट्र पुलिस के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

- एक अफसर होने के नाते मेरा इस संबंध में किसी तरह की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। वैसे महाराष्ट्र पुलिस की कार्यप्रणाली जगजाहिर है। अगर जांच गंभीरता से हो तो तथ्यों को ज्यादा देर तक छुपाया नहीं जा सकता। इस मामले में भी सच्चाई सामने आ ही जाएगी। किसी के बाधा पैदा करने से वक्त लग सकता है, लेकिन सत्य नहीं बदलता।

Posted By: Himanshu Sharma

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