रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

राजधानी में चल रहे शैक्षणिक संस्थानों में नियम-कायदों का पालन ही नहीं हो रहा है। शहर में एक महीने के भीतर आदिवासी छात्रवासों से तीन रैगिंग के मामले आ चुके हैं। अब तक प्रशासन यहां पर एंटी रैगिंग कमेटी नियुक्त नहीं कर पाया है। नईदुनिया ने पड़ताल की तो पाया कि शहर के प्रमुख छात्रावासों में एंटी रैगिंग कमेटी तो दूर शिकायत पेटी तक नहीं है। नियमानुसार सभी शैक्षणिक संस्थानों में शिकायत पेटी या सुझाव पेटी लगाना अनिवार्य है। नईदुनिया ने पड़ताल की तो पाया कि शहर के प्रमुख छात्रावासों में शिकायत पेटी तक नहीं है। एक दिन पहले फिर पेंशनबाड़ा छात्रावास में अनाधिकृत रह रहे छात्रों ने छत्तीसगढ़ कॉलेज में एलएलबी कर रहे छात्र के साथ मारपीट कर दी। यह मामला भी एंटी रैगिंग कमेटी के हवाले करके प्रशासन ने फिलहाल पल्ला झाड़ लिया है। इसके पहले दो दिनों के भीतर राजधानी के पेंशनबाड़ा और दीनदयाल उपाध्याय नगर हॉस्टलों में आदिवासी छात्रों से रैगिंग के मामले में शासन-प्रशासन की नींद टूटी थी। छात्रों से पूछताछ के बाद खुद आदिवासी विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सभी हॉस्टलों में एंटी रैगिंग सेल गठित करने के निर्देश दिया था। बतादें कि शहर में अकेले 45 कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी सीमा रायपुर से लगती है। यहां टॉप कॉलेजों में भी सुझाव पेटी की स्थिति बेहद खराब है। यहां दिखावे के लिए सुझाव पेटी लगाई गई है। कॉलेजों में पढ़ रहे अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग के हॉस्टलों में असुरक्षा का माहौल है। यहां आने-जाने वाले बच्चों पर निगरानी के लिए न ही कोई सिस्टम बना है न ही सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। ऐसे में अनाधिकृत रूप से कोई भी छात्र घुस जाते हैं।

केस 01

आने-जाने में कोई रोकटोक नहीं

राजधानी के पेंशनबाड़ा स्थित अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावास में नईदुनिया टीम पहुंची। यहां देखा कि आने-जाने वालों के लिए कोई रोकटोक नहीं है। छात्रावास से अधीक्षक गायब मिले। इसी तरह यहां पर सुझाव पेटी तक नहीं लगी थी। यहां रहने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि पहले ही टूटकर गिर चुकी है तबसे अधीक्षक ने कोई पेटी नहीं लगवाया है।

केस 02

अनाधिकृत लोगों का बसेरा

राजधानी के देवपुरी में अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावास के कुछ छात्रों ने बताया कि यहां अधीक्षक की मिलीभगत से कुछ अनाधिकृत छात्र पहुंच रहे हैं। सरकारी सुविधाओं का दुरूपयोग किया जा रहा है। कभी परीक्षा तो कभी पढ़ाई के बहाने यहां अनाधिकृत छात्रों को अधीक्षक शरण दे रहे हैं। यह तब स्थिति है जब कुछ दिन पहले जिले की अपर कलेक्टर पद्मिनी भोई ने शहर के सभी 58 सरकारी छात्रावासों के अधीक्षकों की बैठक ली थी। पद्मिनी भोई ने दोटूक कहा था कि सभी हास्टलों में अनाधिकृत रूप से रहने वाले छात्र-छात्राओं की जांच की जाए।

केस 03

सुरक्षा के इंतजाम नहीं

राजधानी के टिकरापारा स्थित अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावास में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। यहां भी शिकायत पेटी मौके से गायब है। तमाम कानून होने के बाद भी राजधानी के हॉस्टलों में अभी तक एंटी रैगिंग कानून का पालन नहीं हो रहा है। नियमानुसार हॉस्टलों में भी एंटी रैगिंग सेल गठित होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन की यह बड़ी चूक है। अकेले छत्तीसगढ़ में पिछले दस साल में 88 रैगिंग के मामले आ चुके हैं। ज्यादातर प्रकरणों में लीपापोती की जाती है।

वर्जन

सेल गठित करने का प्रस्ताव दिया है

सभी छात्रावासों में एंटी रैगिंग सेल गठित करने का प्रस्ताव दिया है। यहां अनाधिकृत रहने वाले छात्रों को हटाया जाएगा। - विनीत नंदनवार, एडीएम रायपुर

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पेटी लगाई जाएगी

सभी को यहां सुझाव पेटी लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। फिर पेटी लगाई जाएगी। - तारकेश्वर देवांगन, उपायुक्त, आदिवासी विकास विभाग रायपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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