रायपुर (नईदुनिया)। कोरोना महामारी के दौरान निराश्रित या अनाथ हुए बच्चों को महतारी दुलारी योजना का लाभ देने के लिए अब नियमों की तकनीकी दिक्कतें नहीं होगी। स्वास्थ्य एवं स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) की सूची के आधार पर ही योजना का लाभ दिया जाए।

बच्चों से कोई अलग से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। जिलों सेे सीएमएचओ के सर्वे के अनुसार कोरोना के चलते प्रदेश में छह हजार बच्चे निराश्रित हो चुके हैं। इनमें किसी की मां तो किसी के पिता कोरोना से दिवंगत हो चुके हैं। राज्य सरकार ने 'छत्तीसगढ़ महतारी दुलारी योजना 2021' की शुरुआत की है।

इस योजना को लेकर नईदुनिया ने खबर प्रकाशित की थी कि किस तरह अभिभावकों की मौत कोरोना से हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि करने के लिए बच्चों या उनके स्वजनों को मशक्कत करनी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की सर्वे सूची में आंगनबाड़ी से लेकर स्कूली बच्चों को शामिल किया गया है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग ने भी अलग से सर्वे किया है। इन दोनों ही सूची का मिलान कराया जा रहा है।

इन योजनाओं का मिलेगा लाभ

अब बच्चों के आवेदन पर सीएमएचओ की सूची से मिलान किया जाएगा। इसी के आधार पर महतारी दुलारी योजना के तहत निराश्रित या अनाथ हुए बच्चों को हर महीने कक्षा पहली से 8वीं तक 500 रुपये और कक्षा 9वीं से 12वीं तक एक हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा इन बच्चों को राज्य के 171 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने भी इन बच्चों के लिए कई योजनाएं शुरू की है। 18 साल की उम्र में मासिक वजीफा, 23 साल की उम्र में 10 लाख रुपये, नि:शुल्क शिक्षा,18 साल की उम्र तक पांच लाख रुपये तक मुफ्त बीमा आदि। इनके लिए भी प्रमाण पत्र की दरकार होगी।

वर्जन

कोरोना से प्रभावित होकर मरने वाले लोगों की सूची सभी सीएमएचओ के पास है। कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि इसी सूची के आधार पर बच्चों को महतारी दुलारी योजना का लाभ दें और अन्य प्रमाण पत्र या नियमों की जरूरत नहीं है।

- डॉ. आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं स्कूल शिक्षा

Posted By: Shashank.bajpai

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