रायपुर। आज से दस साल पहले हर घर की सब्जियों में डालने वाले साधारण खड़ा नमक की मदद से अब रुखड़ी (मरगोजा) नामक परजीवी से सरसों की फसलों को बचाया जा सकेगा। यदि किसान सरसों की फसल में रासायनिक दवाई का स्प्रे करता है तो मित्र कीटो के मरने का खतरा रहता हैं। परंतु अब सिर्फ किसान नमक के घोल स्प्रे कर सरसों और मित्र कीटो को बचा सकेंगे। बेमेतरा जिले नवागढ़ के युवा किसान किशोर राजपूत ने अपने खेतों में इसका प्रयोग किया जो सफल साबित हुआ है।

रबी फसल के सीजन में किसानों को सरसों की फसल बुआई के साथ ही मरगोजा का डर सताने लगता है, क्योंकि मरगोजा नामक यह परजीवी सरसों की पैदावार को काफी हद तक कम कर देता है। सरसों की फसल अक्टूबर माह में बोई जाती है जबकि रुखड़ी (मरगोजा) का पता जनवरी में जाकर पता चलता है।

तब तक काफी देर हो चुकी होती है तथा मरगोजा सरसों के पौधे को पूरी तरह से अपने आगोश में लेकर उसकी वृद्घि को रोक देता है। इस कारण किसान की मेहनत पर न सिर्फ पानी फिर जाता है बल्कि फसल की बुआई से कटाई तक लेकर आर्थिक तौर पर किसान को नुकसान झेलना पड़ता है।

रोग लगने से कम हो जाती है पैदावार

आमतौर पर यह माना जाता है कि मौसम फसल के माफिक हो तो सरसों की पैदावार 7 से 8 क्यूंटल प्रति एकड़ होती है। लेकिन जब सरसों की फसल मरगोजा की चपेट में आती है तो पैदावार गिरकर 4 से 5 क्यूंटल तक आ जाती है। नवागढ़ क्षेत्र में करीब दस साल पहले इस बीमारी का पता चला था। तब से यह किसानों के लिए नासूर बनी हुई थी। इससे पहले किसानों को यही सलाह दी जाती कि फसल चक्र को बदलकर ही इससे पीछा छुड़वाया जा सकता है। कुछ किसानों ने इसे खेत से उखाड़ने तथा इसके बीजों को चुन चुनकर खेतों से दूर ले जाकर जलाने की कोशिश की परंतु उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

प्राकृतिक तरीका से होगा पूरा निदान

किशोर राजपूत ने अब इस समस्या का हल ढूंढ लिया है। किशोर के अनुसार सरसों की बिजाई के 25 से 30 दिन बाद 250 ग्राम खड़ी नमक को 120 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में छिड़काव करें। दूसरा स्प्रे तब किया जाना चाहिए जब सरसों की फसल 55 से 60 दिन की हो जाए। तब 500 ग्राम नमक को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे लेटफैन नोजल से किया जाना चाहिए तथा स्प्रे के समय मौसम बिल्कुल साफ होना चाहिए। इसके अलावा खेत में नमी तो हो परंतु पौधे सूखे होने चाहिए। इस पर किसी प्रकार की नमी या ओस की बूंद नहीं हो। किशोर राजपूत का दावा है कि लगातार दो सीजन के इन दो स्प्रे में मरगोजा की समस्या से 90 प्रतिशत तक छुटकारा मिल सकता है।

नवागढ़ में हुआ इसका सफल प्रयोग

सरसों की फसल में लगने वाले मरगोजा की समस्या से निजात पाने के लिए नवागढ़ के खेत में किया गया प्रयोग काफी हद तक सफल रहा है। किसान किशोर राजपूत के खेत में पिछले साल एक एकड़ फसल में नमक युक्त पानी का छिड़काव किया था। इसके बाद उस एक एकड़ में करीब 70 प्रतिशत तक मरगोजा की समस्या खत्म हो गई। दूसरे सीजन में फिर इसी तरह के स्प्रे से 90 प्रतिशत मरगोजा मिट गया जबकि खेत के दूसरे हिस्से में यह समस्या अब भी बरकरार है। नमक 250 ग्राम एक एकड़ जमीन पर लगता है जिसकी कीमत बाजार में 10 रुपये आती हैं। इस नवाचार का उपयोग कर किसान अपनी फसल की गुणवत्ता बढ़कर लागत कम कर सकते हैं। जमीन और मित्र कीटो की रक्षा होगी हैं।

Posted By: Sanjay Srivastava

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