रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

धरसींवा क्षेत्र के कूंरा, कपसदा गांव स्थित फार्च्यून मेटालिका स्टील फैक्ट्री में काम करने वाले दो सौ मजदूरों को दक्षिण अफ्रीका की फैक्ट्री में बंधक बनाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। फैक्ट्री प्रबंधन ने धरसींवा पुलिस थाने में दर्ज मानव तस्करी के केस को खारिज करते हुए गृहमंत्री को एक-एक आरोप का जवाब देते हुए एक पत्र सौंपा है। अब डीजीपी समेत अन्य वरिष्ठ अफसरों को भी यह पत्र सौंपने की तैयारी है।

फार्च्यून मेटालिका स्टील फैक्ट्री के डायरेक्टर अश्विनी गोयल ने गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को सौंपे गए पत्र में बताया कि यहां से दक्षिण अफ्रीका के प्लांट में सभी कुशल कारीगरों को दक्षिण अफ्रीका दूतावास से वर्क वीजा लेने के बाद इमीग्रेशन विभाग की प्रक्रिया से गुजरने के बाद भेजा गया है। हम कारीगरों को बाहर भेजने वाले एजेंट नहीं हैं। यह हमारा इंटरनल ट्रांसफर है। चूंकि हम रिक्रूटिंग एजेंट नहीं हैं, इसलिए हमें रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। अगर दस्तावेजों में कोई त्रुटि होती तो इमीग्रेशन विभाग इमीग्रेंट को जाने से रोक देता। उन्होंने विदेश मंत्रालय में शिकायत करने वाले उत्तराखंड के मजदूर प्रेम सिंह डभोरा के सारे आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि वह दक्षिण अफ्रीका से बिना पासपोर्ट, वीजा के भागकर भारत कैसे आ सकता है? जब वहां पर प्रेम सिंह अन्य मजदूरों से विवाद करने लगा, तब उसे उसकी मर्जी से बाकायदा कंपनी के खर्चे पर 7 जून, 2018 को वापसी की हवाई टिकिट जोहन्सबर्ग से मुंबई के लिए बनवाकर भेजा गया था। कंपनी किसी भी मजदूर को सुविधा का झूठा लालच देकर वहां नहीं भेजती। प्रेम सिंह पर प्रबंधन ने ब्लैकमेल कर बदनाम करने का आरोप लगाया है।

पूछताछ में मजदूरों ने प्रबंधन को अच्छा बताया

(नोट-दोनों मजदूरों के फोटों इस बॉक्स में लगाएं)

शिकायतकर्ता प्रेम सिंह के साथ दक्षिण अफ्रीका में काम कर चुके और वर्तमान में यहां काम कर रहे देवरिया उप्र के फीटर राजकुमार प्रसाद और कुशीनगर के प्रदूमन शर्मा से पुलिस ने पूछताछ की। नईदुनिया से बातचीत में दोनों मजदूरों ने कहा कि प्रेम सिंह झगडालू किस्म का है। वह मजदूरों से विवाद कर उन्हें भड़काने का काम करता था। दक्षिण अफ्रीका में अलग-अलग राज्यों के दो सौ मजदूर अच्छे से काम कर रहे हैं। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं है। फैक्ट्री प्रबंधन सभी सुविधाएं दे रहा है। किसी भी मजदूर को बंधक नहीं बनाया गया है। प्रेम सिंह के सारे आरोप झूठे हैं।

विदेश मंत्रालय ने मांगा डीजीपी से जवाब, कार्रवाई को बताया गलत

फैक्ट्री प्रबंधन ने पिछले दिनों विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखते हुए पुलिस थाने में दर्ज मानव तस्करी के केस की जानकारी दी थी। विदेश मंत्रालय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए 22 अक्टूबर को डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि उत्प्रवास अधिनियम के तहत धारा 10 और 24 में केस दर्ज करना गलत है। ये धाराएं कंपनी पर नहीं लगतीं। इस मामले को लेकर डीजीपी से उचित कार्रवाई करते हुए जानकारी मांगी गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network