मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भेंट-मुलाकात कार्यक्रम बस्तर में अंतिम चरण में पहुंच गया है। क्षेत्र की 12 में 11 सीटों से कांग्रेस के विधायक हैं। मुख्यमंत्री हर विधानसभा में सभा करके लोगों से समस्याएं पूछ रहे हैं और मौके पर ही समाधान के निर्देश भी दिए जा रहे हैं।

सुबह 10 बजे से शुरू हो रहा कार्यक्रम रात के 11 बजे के बाद ही सिमट पा रहा है। व्यस्त कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री से बस्तर के गंभीर जल संकट से लेकर शिक्षा के स्तर तक पर हुई बातचीत का मुख्य अंश प्रस्तुत है --

प्रश्न – क्या माना जाए कि बोधघाट परियोजना 43 साल बाद एकबार फिर ठंडे बस्ते में जा रही है?

उत्तर – ठंडे बस्ते में नहीं है। पूरे बस्तर में जल स्तर बहुत नीचे है। सुकमा जिले में पानी क हजार फीट नीचे तक नहीं मिल रहा है। दंतेवाड़ा में भी ऐसी ही स्थिति वही है। जल स्तर बहुत नीचे है। अभी जागरूकता आने के साथ खेती की तरफ लोगों का रुझान बढ़ रहा है।

ऐसे में सिंचाई के लिए पानी चाहिए। निस्तार के लिए भी पानी चाहिए। घर-घर में नल लगा रहे हैं तो उसके लिए भी पानी चाहिए। आज नहीं तो कल यहां के लोग समझेंगे कि यह बोधघाट परियोजना कितना जरूरी है। जबतक कि लोगों सहमति नहीं बनेगी तबतक शुरू नहीं करेंगे। और जब सर्वानुमति होगी तभी बनाएंगे।

परियोजना की घोषणा 1979 में हुई थी। एक तरफ सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी है और दूसरी तरफ प्रदेश के हिस्से का इंद्रावती का पानी बेकार बह रहा है। दिक्कत क्या आ रही है?

कुछ लोग तो राजनीतिक स्वार्थवश परियोजना का विरोध कर रहे हैं। कुछ अंदर वाले विरोध करा रहे हैं। उसके कारण लोगों को नुकसान हो रहा है। अभी मांग आ रही है कि जितने नदी किनारे हैं उनको बिजली कनेक्शन दें। ट्रांसफार्मर लगाएं और सोलर पंप लगाएं। वो सब काम कर रहे हैं। तेजी से नदी का पानी भी कम होगा। एनीकट की स्वीकृति भी दिए हैं। लोग अब पानी की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। समझ रहे हैं। धीरे से वह लोग भी समझेंगे जो विरोध कर रहे हैं।

प्रश्न - गोधन न्याय योजना और गोठानों का क्या भविष्य देख रहे हैं? अगला चरण क्या होगा?

उत्तर --- गांव, ब्लाक और प्रदेश घोषित करने का काम भारत सरकार है। राज्यों के पास तहसील, जिला और संभाग की स्थापना का अधिकार है। ब्लाक मुख्यालय से विकास के काम स्वीकृत करते हैं। प्रदेश में 57 नए ब्लाकों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार के पास प्रस्ताव है। वहीं से स्वीकृति मिलनी है।

प्रश्न -- उम्मीद की जा रही है कि नगरनार स्टील प्लान शुरू होने के बाद बस्तर की तस्वीर बदलेगी। दूसरी तरफ सहायक उद्योगों के लिए जमीन की कमी होगी। एसईजेड के लिए जमीन अधिग्रहण का काम क्यों नहीं हो पा रहा है?

उत्तर – नगरनार के लिए किसानों और आदिवासियों के लिए जमीन लेकर दिए हैं। उसको निजी हाथों में बेच रहे हैं।

पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर क्या स्थिति बन रही है।

उत्तर – राज्य सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन किया जा चुका है। अब केंद्र सरकार को चाहिए कि वह हमारे हिस्से का पैसा दे। कब केंद्र कबतक देगा यहा देखना है।

कहा जा रहा है कि अगला चुनाव अब आपके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इसके साथ मंत्रिमंडल में बदलाव की भी उम्मीद की जा रही है।

यह दोनों विषय हाई कमान का है। हाई कमान ही तय करेगा कि किसके नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाना है। मंत्रिमंडल में बदलाव भी हाई कमान के आदेश और सहमति के बिना कुछ नहीं होगा।

प्रश्न – आप अभी तक 20 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में घूम चुके हैं। जो समस्याएं और प्रशासनिक विफलताएं सामने आ रही हैं उसके आधार पर कितने प्रशासनिक सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।

उत्तर – विपरीत परिस्थिति और वैश्विक आपदा की चुनौती का प्रशासन से सफलतापूर्वक सामना किया। अब जो जाति प्रमाणपत्र, नामांतरण, राशन कार्ड आदि योजनाओं को प्राथमिकता दिया जाना है।

प्रशासनिक निगरानी के लिए क्या कर रहे हैं?

हर विभाग के पोर्टल बन गए हैं। सचिव और मंत्री स्तर तक निगरानी हो रही है। भेंट-मुलाकात के दौरान की जा रही घोषणाओं और इस दौरान आ रही शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जा रहा है। ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है कि सभी कार्रवाई संबंधित लोगों तक उपलब्ध हो।

प्रश्न - आत्मानंद स्कूल के प्रति लोगों का रुझान दिख रहा है। क्या शिक्षा का बजट और बढ़ाए जाने की जरूरत नहीं है?

शिक्षा का बजट बढ़ा भी दें तो बड़ा सवाल है कि उतने योग्य शिक्षक कहां से आएंगे? योग्य शिक्षकों की भर्ती बड़ी चुनौती है। गुणवत्ता से हम समझौता नहीं करना चाहते। बहुत से स्कूल खोल दें और गुणवत्ता ठीक नहीं हो तो कोई फायदा नहीं है। उसको ध्यान में रखते हुए हमको आगे बढ़ना है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से ही इस कमी को पूरा किया जा सकेगा।

Posted By: Pramod Sahu

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