रायपुर। भगवान श्रीराम के ननिहाल चंदखुरी के लोगों को देश में 'रामराज्य" चाहिए। लोकसभा चुनाव की चर्चा के दौरान काफी लोगों ने कहा कि केंद्र में ऐसी सरकार बने, जो शांति, सुरक्षा, समृद्धि, समानता, भाईचारा, बेहतर शिक्षा, संस्कार और न्याय को बढ़ावा दे। 'रामराज्य" से उनका यही आशय है। अधिकतर लोगों ने कहा कि वे किसी भी दल की राजनीति में नहीं पड़ते। उन्हें वही दल पसंद है, जो देश के हित में काम करे और जनता को खुशहाली दे। छोटे कस्बे की शक्ल में बसे चंदखुरी की दुकानों और सड़कों पर चुनावी चर्चाएं खूब हो रहीं हैं।

जलपान की एक दुकान में कुछ लोग चाट का ऑर्डर देकर बैठे हुए थे। चुनावी माहौल के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि कांग्रेस के प्रत्याशी प्रमोद दुबे एक दिन यहां आए थे और कुछ लोगों से मिलकर चले गए। भाजपा के प्रत्याशी सुनील सोनी भी आए थे।

चुनाव-प्रचार शुरू हो चुका है और जोर पकड़ रहा है। दोनों पार्टियों को पसंद करने वाले लोग यहां हैं। जिस पर माता कौशिल्या और राम की कृपा होगी, वही जीतेगा। लेकिन आज तक नेताओं ने माता कौशिल्या की इस जन्म-स्थली का किसी तरह से व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया। बस वोट लेने के लिए कौशिल्या और राम का नाम लेते हैं।

गन्ने का जूस पी रहे एक ग्रामीण ने चुनाव के बारे में पूछने पर कहा कि यहां कांग्रेस का जोर है। वह कांग्रेस के काम को पसंद करता है और चाहता है कि केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार बने। उसने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुखौटे से डरा रहे हैं। जब अभी यह हाल है तो जीतने पर तो और डराएंगे। मुखौटा ही देश का डर है। यहीं मौजूद एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि पहला चुनाव ऐसा देखा जिसमें जमीनी मुद्दे गायब हैं। एक व्यक्ति के पक्ष और विरोध में चुनाव हो रहा है।

फोटो मत छापबे... नाम घलो मत लिखब

एक ग्रामीण सिटी बस का इंतजार करते हुए बैठा था। चुनाव और क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में पूछने पर उसने कहा कि गरीबों और छोटे किसानों का यहां गुजारा नहीं है। न तो खेती में दम है और न ही रोजगार के कोई अन्य साधन हैं। खेतों को पानी नहीं मिल पाता। खाद-बीज के लिए कर्ज लेना पड़ता है।

चुनाव के समय हर प्रत्याशी विकास की बात करता है, लेकिन जीतने के बाद कोई गरीबों की सुध नहीं लेता है। गांवों का विकास करने की जरूरत है। जब उस आदमी से उसका नाम पूछा गया और फोटो खींचने के लिए मोबाइल निकाला गया तो उसने घबराकर कहा-'फोटो मत छापबे भइया। मोर नाम घलो मत लिखबे। फोटो अऊ नाम छाप देबे त हमर क्षेत्र के नेतामन मोर जीना हराम कर दीही।"

माता कौशिल्या की जन्म-स्थल

यहां यह खास तौर पर उल्लेख कर दूं कि चंदखुरी भगवान राम की माता कौशिल्या की जन्म-स्थली है। यह धार्मिक महत्व का स्थल राज्य-मुख्यालय रायपुर से लगा हुआ है। रायपुर से मात्र 20 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन और पंडरी बस-स्टैंड से वाहन-सुविधा उपलब्ध है।

रायपुर-महासमुंद मार्ग स्थित मंदिर हसौद से चंदखुरी जाने के लिए मार्ग कटता है। यहां पहुंचने के लिए सिटी बससेवा उपलब्ध है। यहां माता कौशिल्या का मंदिर बना हुआ है, जहां चैत्र रामनौवीं के दिन इलाके के लोग माता कौशिल्या के दर्शन करने आते हैं। चैत्र की पूरी नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का रेला लगा रहता है। बाकी दिनों भी पर्यटक और भक्त यहां आते रहते हैं।

ग्रामीणों ने स्वच्छता अभियान को सराहा

रामनौवीं के दिन माता कौशिल्या के दर्शन करने आए ग्रामीणों ने इच्छा जताई कि फिर से भाजपा की ही सरकार बननी चाहिए। लोगों ने मोदी को अच्छा प्रधानमंत्री करार भी दिया। मोदी के स्वच्छता अभियान को सराहा और पाकिस्तान को धूल चटाने की बात पर उनका सीना तन गया।

छत्तीसगढ़ के लोग श्रीराम को कहते हैं 'भांचा"

छत्तीसगढ़ की जनता श्रीराम को भांजा मानती है। बड़े ही श्रद्धा-भाव से लोग उन्हें छत्तीसगढ़ी बोली में 'भांचा" कहते हैं। श्रीराम का चूंकि यहां ननिहाल है, इसलिए लोग भांजे को बहुत ही सम्मान देते हैं। यहां हर भांजा अपने मामा को अति प्रिय होता है। गांवों में यह भाव अपेक्षाकृत अधिक व्यापक है।