दीपक शुक्ला रायपुर। Constitution Day: भारतीय संविधान निर्माण अहम भूमिका निभाने वाले आज भी हमारे भाग्यविधाता हैं, जिनके हाथों से भारतीय संविधान की स्वर्णिम मूल पर हस्ताक्षर हैं। 26 जनवरी 1950 को जो भारतीय संविधान लागू हुआ उसके निर्माण में छत्तीसगढ़ के माटी पुत्रों की खास भूमिका रही। संविधान की मूल प्रति पर जिनके हस्ताक्षर हैं उनके नाम से प्रदेश में स्कूल-कालेज और विश्वविद्यालय हैं। इन इमारतों को देखकर आज भी संविधान के प्रति आस्था रखने वालों के जज्बात छलकते हैं।

बता दें कि छत्तीसगढ़ अंचल के रियासतों से किशोरीमोहन त्रिपाठी व रामप्रसाद पोटाई एवं मध्यप्रांत सीपी बरार (छत्तीसगढ़) के प्रतिनिधियों में रायपुर से पंडित रविशंकर शुक्ल, बालोद से बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल और दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्ता ने सभा के सदस्य के तौर पर बेहद अहम भूमिका निभाई।

पंडित रविशंकर शुक्ल के नाम से विश्वविद्यालय

संविधान सभा के सदस्य मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म सागर में हुआ था। इनके नाम से पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय आज सबसे बेहतर विवि के तौर पर काबिज है। रविवि के ला की प्रोफेसर एवं कानून विद डा. प्रिया राव ने बताया कि संविधान सभा के सदस्य के तौर पर संविधान के निर्माण में स्व. पं. रविशंकर शुक्ल ने अहम भूमिका निभाई थी। रायपुर में शुक्ल ने विद्या मंदिर योजना चलाकर यहां कई पाठशालाओं की स्थापना की थी।

ठाकुर छेदीलाल के नाम से कालेज, रामायण से जगाई थी अलख

अंचल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैरिस्टर छेदीलाल का जन्म बिलासपुर के अकलतरा में 1886 में हुआ था। संविधान सभा के सदस्य के तौर पर इनकी अहम भूमिका की वजह हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत पर इनका पूरा अधिकार होना बताया जाता है। बिलासपुर अंचल में जागरूकता के लिए रामलीला मंच से राष्ट्रीय रामायण का अभिनव प्रयोग किया। उनके नाम से जांजगीर-चांपा जिले में महाविद्यालय संचालित है।

संविधान की हिंदी शब्दावली पर दिया जोर

दुर्ग अंचल के घनश्याम सिंह गुप्ता ने राष्ट्रीय आंदोलन में राजनीतिक सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में भी योगदान दिया। संविधान सभा के सदस्य के तौर पर उन्होंने संविधान की हिंदी शब्दावली पर अहम योगदान दिया था। नवंबर 1933 में गांधी जी दुर्ग आए तो घनश्याम सिंह गुप्ता के निवास में गए थे। घनश्याम सिंह गुप्ता के नाम से बालोद में कालेज संचालित है।

विलयकरण का मुद्दा उठाए थे पोटाई

कांकेर जिले के कन्हारपुरी गांव निवासी रामप्रसाद पोटाई भी संविधान सभा के सदस्य थे। उन्हें रियासत के प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया था। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए संविधान में आवाज उठाई। बताया जाता है कि रामप्रसाद पोटाई के साथ किशोरी मोहन त्रिपाठी ने मध्य प्रांत की रियासतों के विलयकरण की मांग का 'मेमोरेंडम" सरदार वल्लभ भाई पटेल को सौंपा था।

पंचायती राज की वकालतकर्ता त्रिपाठी

रायगढ़ निवासी पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी भी भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे। छत्तीसगढ़ कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. भूपेंद्र करवंदे ने बताया कि वे संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के भी सदस्य थे। बाल श्रम को रोकने और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के अनुरूप पंचायती राज स्थापना जैसे विषयों को शामिल करने में पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी की अहम भूमिका रही।

Posted By: kunal.mishra

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