रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। इसी दिन श्रवण नक्षत्र होने से ब्राह्मण, साधु, संत, वेद की शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी जनेऊ बदलने की परंपरा निभाते हैं और भारतीय संस्कृति का पालन करने का संकल्प लेते हैं। इसे श्रावणी उपाकर्म कहा जाता है। रक्षाबंधन पर पड़ रहे अनोखे संयोगों में इस बार कोरोना महामारी के चलते ब्राह्मण, साधु, संत अपने घर, आश्रम में ही श्रावणी उपाकर्म की परंपरा निभाएंगे। हर साल पवित्र नदियों में स्नान करके जनेऊ बदलते थे, लेकिन इस बार घर में ही स्नान कर परंपरा निभाई जाएगी।

संस्कृत भारती के प्रवक्ता चंद्रभूषण शुक्ला के अनुसार 1969 से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आदेश से केंद्रीय तथा राज्य स्तर पर सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन पर संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है। हमारे ऋषि मुनि ही संस्कृत साहित्य के आदिश्रोत हैं इसलिए इसी दिन श्रावणी उपाकर्म भी संपन्ना होता है। 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की पहल पर संस्कृत वर्ष मनाया गया और संस्कृत सप्ताह मनाया जाना प्रारंभ हुआ। संस्कृत सप्ताह रक्षाबंधन श्रावणी पूर्णिमा के तीन दिन पहले और तीन दिन बाद तक मनाया जाता है और रक्षाबंधन को संस्कृत दिवस मनाया जाता है।

कोरोना महामारी के चलते इस बार संस्कृत भारती संगठन के सानिध्य में देशभर में ऑनलाइन संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ 31 जुलाई से शुरू हुआ, जो 6 अगस्त को समाप्त होगा। इसके माध्यम से संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। संस्कृत सप्ताह शुरू होने के पहले राफेल विमानों का स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत के श्लोक से ट्वीट करते हुए किया है।

छत्तीसगढ़ में 18 साल से मना रहे

संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डॉ. दादूभाई त्रिपाठी ने बताया कि 25 मार्च 2003 को छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामंडलम (संस्कृत बोर्ड) की स्थापना हुई। इसके बाद से संस्कृत सप्ताह हर साल रक्षाबंधन पर मनाया जा रहा है। सात दिन तक गोष्ठी, श्लोक प्रतियोगिता, संस्कृत भाषण प्रतियोगिता, नाटक , शिविर, संस्कृत प्रदर्शनी का आयोजन होता रहा है। ऑनलाइन आयोजन में संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, प्रांत मंत्री डॉ. दादूभाई त्रिपाठी, शिक्षण प्रमुख डॉ. लक्ष्‌मीकांत पंडा, प्रचार प्रमुख पं. चंद्रभूषण शुक्ला, हेमंत साहू बिलासपुर से सहप्रांत अध्यक्ष डॉ. राजकुमार तिवारी, सह प्रांत मंत्री डॉ. गोपेश तिवारी, दुर्गेश तिवारी, महासमुंद से प्रफुल्ल त्रिपाठी, सरगुजा से राजेश भगत आदि योगदान दे रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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