रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। लाकडाउन के बाद से धीरे-धीरे उद्योग, खेल और शादी समारोह के लिए प्रशासन ने अनुमति दे दी है, लेकिन सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रशासन की ओर से कोई दिशा निर्देश तय नहीं किया गया है। यही वजह है कि दूसरों का मनोरंजन करने वाले रंगकर्मी इन दिनों मायूस बैठे हुए हैं। पिछले आठ माह से राजधानी रायपुर में एक भी मंचन नहीं हुआ है। रंगकर्मियों की मानें तो भोपाल, इंदौर समेत विभिन्ना बड़े शहरों में नाट्य मंचन के साथ ही सांस्कृतिक आयोजन शुरू हो गए हैं, लेकिन राजधानी रायपुर में शहर के भवनों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए प्रशासन की ओर से कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है।

उल्लेखनिय है कि शहर में इस सीजन में सैकड़ों सांस्कृतिक आयोजन होते थे। इसमें सबसे अधिक मुक्ताकाश मंच में होता था। रंग श्रृंखला नाट्य मंच के हीरा मानिकपुरी बताते हैं कि प्रशासन की ओर से किसी तरह का कोई दिशा निर्देश नहीं दिया गया है। नाट्य मंचन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान मुक्ताकाश मंच है, लेकिन वहां कोरोना काल की वजह से नाट्य मंचन की अनुमति नहीं दी जा रही है।

सबसे कम मुक्ताकाश मंच का किराया

राजधानी रायपुर में यूं तो बहुत से आडिटोरियम और भवन हैं, लेकिन सबसे ज्यादा कार्यक्रम मुक्ताकाश मंच में होता है। इसकी मुख्य वजह यहां का किराया है। यहां एक दिन का तीन हजार रुपये लगता है। कलाकारों की मानें तो राजधानी में मुक्ताकाश मंच का सबसे कम किराया होने की वजह से यह पहली पसंद है। यहां दूर-दूर से कलाकार अपनी प्रस्तुति देने आते हैं। खुला मंच होने के साथ ही दर्शकों की बैठने की भी यहां व्यवस्था है।

तीन माह में 40 कार्यक्रम

संस्कृति विभाग के प्रताप पारख बताते हैं कि अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक मुक्ताकाश मंच पर करीब 40 कार्यक्रम होते थे। वर्तमान में कार्यक्रम के लिए प्रशासन से कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है, जिसकी वजह से कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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